
देहरादून: देवभूमि की परंपरा और आधुनिक विकास के संगम का एक अद्भुत नजारा मंगलवार को देहरादून नगर निगम के 27वें स्थापना दिवस समारोह में देखने को मिला। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वागत पारंपरिक वाद्य यंत्रों ‘ढोल-दमाऊ’ की गूंज और लोक संस्कृति के रंगों के साथ किया गया।
परंपरा के साथ विकास का आगाज
जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, पहाड़ की संस्कृति की पहचान ‘ढोल-दमाऊ’ की थाप ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया। इस आत्मीय स्वागत से अभिभूत सीएम धामी ने भी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। यह क्षण केवल एक स्वागत रस्म नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक विरासत के सम्मान का प्रतीक बन गया।
शहर को मिली करोड़ों की सौगात
इस जश्न को दोगुना करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने शहरवासियों को विकास कार्यों का बड़ा तोहफा दिया।
- 40 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास: सीएम ने नगर निगम क्षेत्र में लगभग 40 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया।
- हर वार्ड को 80 लाख: जमीनी स्तर पर विकास को गति देने के लिए घोषणा की गई कि प्रत्येक वार्ड को 80 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है, जिससे स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा।
- ई-ऑफिस का शुभारंभ: पारदर्शिता और डिजिटल क्रांति की ओर कदम बढ़ाते हुए नगर निगम में ‘ई-ऑफिस’ प्रणाली और ‘ई-कोष’ वेबसाइट की भी शुरुआत की गई।
स्वयं सहायता समूहों का हौसला बढ़ाया
समारोह में मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की सराहना की और मातृशक्ति के प्रयासों को आत्मनिर्भर उत्तराखंड की रीढ़ बताया।
मुख्यमंत्री का संदेश
अपने संबोधन में सीएम धामी ने कहा, “देहरादून केवल एक शहर नहीं, बल्कि पूरे राज्य का चेहरा है। नगर निगम के 27 साल के सफर में हमने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन अभी हमें इसे देश का सबसे स्वच्छ और स्मार्ट शहर बनाना है।” उन्होंने स्वच्छता सर्वेक्षण में देहरादून की रैंकिंग सुधारने के लिए सफाई मित्रों (स्वच्छता सेनानियों) की भी पीठ थपथपाई।
समारोह की झलकियां:
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: रंगारंग प्रस्तुतियों ने समा बांधा।
- कॉफी टेबल बुक: नगर निगम की उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन।
- सम्मान: उत्कृष्ट कार्य करने वाले निगम के कर्मचारियों और पार्षदों को सम्मानित किया गया।
यह आयोजन न केवल एक सरकारी रस्म अदायगी थी, बल्कि दून वासियों के लिए अपनी संस्कृति पर गर्व करने और बेहतर भविष्य के सपने देखने का एक सुनहरा अवसर भी था।
