
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वैश्विक निवेशक सम्मेलन में हुए एमओयू के तहत निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए सभी विभागों में नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे। ये अधिकारी निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग की नियमित निगरानी करेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान किए गए एमओयू एवं निवेश प्रस्तावों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि एमओयू और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का शीघ्र समाधान किया जाए। यदि किसी नीति में संशोधन, सरलीकरण या शिथिलीकरण की आवश्यकता हो तो उसका प्रस्ताव तत्काल तैयार कर प्रभावी पैरवी की जाए।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों के साथ नियमित संवाद और संपर्क बढ़ाने, राज्य की बेहतर कानून-व्यवस्था, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, डिजिटलीकरण तथा उद्योग-अनुकूल इकोसिस्टम से संबंधित सुधारों की जानकारी निवेशकों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने आध्यात्मिक जोन, आयुर्वेद एम्स तथा भराड़ीसैंण में मंदिर निर्माण परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए।
अब तक 1.07 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग
दिसंबर 2023 में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन में 3.57 लाख करोड़ रुपये के 1779 निवेश प्रस्तावों पर एमओयू किए गए थे। इनमें से अब तक 1.07 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तराखंड के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह राज्य में निवेशकों के बढ़ते विश्वास, बेहतर कानून-व्यवस्था, सुशासन और उद्योग-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है।
पर्यटन, उद्योग और निवेश के नए अवसरों पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए कि आतिथ्य क्षेत्र में होटल निर्माण की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए पिथौरागढ़, कैंची धाम सहित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि विशेष पर्यटन क्षेत्रों के लिए एरिया-आधारित फोकस पॉलिसी तैयार की जा रही है।
संस्कृति, अध्यात्म और संतुलित विकास को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और प्राचीन गौरवशाली विरासत का केंद्र है। इसे ध्यान में रखते हुए इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन पर आधारित विश्वविद्यालय की स्थापना, हिंदू स्टडीज सेंटर और प्राच्य शोध केंद्र स्थापित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
