
देहरादून। केंद्र सरकार द्वारा देश में जनगणना की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड में भी प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है। जनगणना के नियमों के तहत अधिसूचना जारी होते ही राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक सीमाएं तत्काल प्रभाव से ‘फ्रीज’ (सील) कर दी गई हैं। अब जनगणना का कार्य पूर्ण होने तक राज्य में किसी भी नए जिले, तहसील या नगर निकाय का गठन नहीं किया जा सकेगा।
प्रशासनिक सीमाएं सील, अब नहीं बदलेंगे वार्ड और जिले
जनगणना के कड़े नियमों (नियम 10) के अनुसार, एक बार अधिसूचना जारी होने के बाद किसी भी राज्य की सीमाओं में बदलाव करना प्रतिबंधित हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि उत्तराखंड सरकार अब जनगणना पूरी होने तक न तो किसी नई तहसील या जिले की घोषणा कर सकेगी और न ही नगर निगमों, नगर पालिकाओं या पंचायतों के वार्डों की सीमाओं में फेरबदल किया जा सकेगा। यह रोक इसलिए लगाई गई है ताकि आंकड़ों के संकलन और विश्लेषण में कोई विसंगति न आए।
उत्तराखंड में 3 चरणों में होगी गणना (शेड्यूल)
राज्य की भौगोलिक विषमताओं और पहाड़ों में होने वाली बर्फबारी को देखते हुए उत्तराखंड में जनगणना का कार्य तीन अलग-अलग चरणों में संपन्न कराया जाएगा:
- प्रथम चरण (25 अप्रैल से 24 मई 2026): इस दौरान राज्य के अधिकांश मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मकान सूचीकरण (House Listing) और जनसंख्या गणना का कार्य होगा। कर्मचारी घर-घर जाकर परिवारों का विवरण जुटाएंगे।
- द्वितीय चरण (11 सितंबर से 30 सितंबर 2026): यह चरण विशेष रूप से उच्च हिमालयी और उन बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए है, जहाँ सर्दियों में पहुंचना कठिन होता है। इन दुर्गम इलाकों की गणना मौसम की अनुकूलता के अनुसार इसी दौरान पूरी की जाएगी।
- तृतीय चरण (9 फरवरी से 28 फरवरी 2027): इस अंतिम चरण में शेष बचे क्षेत्रों के आंकड़े जुटाए जाएंगे और डेटा का मिलान कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
16 फरवरी से शुरू होगा ‘ट्रेनिंग’ का महाअभियान
जनगणना को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। 16 फरवरी से राज्य में बहुस्तरीय प्रशिक्षण शुरू होगा:
- मास्टर ट्रेनर: पहले चरण में 23 अनुभवी कर्मचारी मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित होंगे।
- फील्ड ट्रेनर: इसके बाद 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनिंग दी जाएगी।
- सुपरवाइजर: लगभग 4000 सुपरवाइजर जमीनी स्तर पर निगरानी और मार्गदर्शन के लिए तैनात किए जाएंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?
यह जनगणना केवल लोगों की गिनती मात्र नहीं है, बल्कि अगले 10-15 वर्षों के लिए उत्तराखंड के विकास का खाका इसी डेटा पर आधारित होगा। संसाधनों का वितरण, सरकारी योजनाएं, निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation) और नीतिगत फैसले इन्हीं सटीक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। राज्य प्रशासन ने प्रत्येक नागरिक का विवरण पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से दर्ज करने के लिए कमर कस ली है।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
- अधिसूचना लागू: राज्य की प्रशासनिक सीमाएं पूरी तरह स्थिर।
- प्रशिक्षण: 16 फरवरी से ट्रेनिंग शुरू।
- जनगणना शुरू: 25 अप्रैल 2026 से जमीनी स्तर पर कार्य।
- विशेष ध्यान: उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए अलग समय-सारिणी।
