
देहरादून | देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधामों में प्रवेश को लेकर लिए गए मंदिर समितियों के फैसलों ने राज्य में नई सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। बदरी-केदार के बाद अब गंगोत्री मंदिर समिति ने भी गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर कड़े नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई गैर-सनातनी गंगोत्री धाम में प्रवेश करना चाहता है, तो उसे ‘पंचगव्य’ का पान करना होगा।
गंगोत्री धाम का नया नियम: पंचगव्य से होगा ‘शुद्धिकरण’
गंगोत्री मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर-सनातनियों के लिए विशेष शर्तें तय की गई हैं।
- क्या है शर्त: मंदिर में प्रवेश से पहले व्यक्ति को पंचगव्य (गाय का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी का मिश्रण) ग्रहण करना होगा।
- तर्क: समिति का मानना है कि पंचगव्य का सेवन व्यक्ति की सनातन धर्म में आस्था को दर्शाता है और उसे आध्यात्मिक रूप से शुद्ध बनाता है। गाय को माता मानने वाले धर्म में इन तत्वों का सर्वोच्च स्थान है।
बदरी-केदार में एफिडेविट की अनिवार्यता
इससे पहले बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने भी इसी तरह का सख्त रुख अपनाया था। वहां नियम बनाया गया है कि अगर कोई गैर-सनातनी दर्शन करना चाहता है, तो उसे एक शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा। इसमें उसे अपनी आस्था और मंदिर के नियमों के पालन की लिखित प्रतिबद्धता जतानी होगी।
सियासत गरमाई: कांग्रेस और भाजपा के अलग-अलग तर्क
मंदिर समितियों के इन फैसलों पर उत्तराखंड की राजनीति दो फाड़ हो गई है:
1. कांग्रेस: ‘यह चुनावी एजेंडा है’
विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला कदम बताया है। नेताओं का कहना है कि:
- मुस्लिम समाज या अन्य गैर-सनातनी वैसे भी मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, इसलिए वे दर्शन के लिए नहीं जाते।
- यह फैसला केवल आगामी चुनावों को देखते हुए ध्रुवीकरण करने के लिए लिया गया है।
- इससे उत्तराखंड के सामाजिक सौहार्द पर बुरा असर पड़ेगा।
2. भाजपा: ‘मर्यादा और रील संस्कृति पर रोक जरूरी’
सत्ताधारी दल भाजपा के विधायक विनोद चमोली ने इस मुद्दे पर सधा हुआ बयान दिया है। उन्होंने कहा:
- शायद इतने कठोर फैसलों की जरूरत नहीं थी क्योंकि गैर-सनातनी आमतौर पर मंदिरों में नहीं आते।
- हालांकि, आजकल कई लोग धार्मिक स्थलों पर केवल ‘रील’ बनाने या मनोरंजन के लिए आते हैं, जिससे धाम की गरिमा गिरती है। ऐसे लोगों को रोकने के लिए समिति ने यह कदम उठाया हो सकता है।
क्या ये फैसले जरूरी हैं?
उत्तराखंड के चारों धाम (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
- पक्ष: मंदिर समितियों का कहना है कि वे केवल अपनी परंपराओं और मर्यादाओं की रक्षा कर रहे हैं।
- विपक्ष: आलोचकों का तर्क है कि भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक देश में इस तरह के प्रतिबंध पर्यटन और समावेशी छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आगे क्या: अब देखना यह होगा कि क्या ये नियम स्थायी रूप से लागू रहेंगे या बढ़ते विरोध के बीच सरकार और प्रशासन इसमें कोई हस्तक्षेप करेगा। फिलहाल, ‘पंचगव्य’ और ‘एफिडेविट’ के इन फैसलों ने चारधाम यात्रा के आगामी सीजन से पहले माहौल गरमा दिया है।
