
न्यूज बुलेट्स (Highlights):
- बजट: मेला नियंत्रण भवन विस्तार के लिए ₹50 करोड़ स्वीकृत।
- तकनीक: 1500 कैमरों वाला कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनेगा।
- नया इंफ्रास्ट्रक्चर: बिल्डिंग के साथ हेलीपैड का निर्माण भी प्रस्तावित।
- राहत: सूखी नदी पर ₹13.21 करोड़ से बनेगा डबल लेन पुल।
- लक्ष्य: महाकुंभ 2027 का सफल और सुरक्षित आयोजन।
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए धामी सरकार ने कमर कस ली है। मेले के सफल संचालन के केंद्र बिंदु यानी ‘मेला नियंत्रण भवन’ (CCR) के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत पुरानी बिल्डिंग के पास ही एक नई अत्याधुनिक इमारत (CCR-2) खड़ी की जाएगी, जो सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी।
हेलीपैड और अत्याधुनिक कमांड सेंटर होगा आकर्षण
मेला नियंत्रण भवन का विस्तार केवल ईंट-पत्थरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे तकनीक के मामले में दुनिया के बेहतरीन केंद्रों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है:
- 1500 सीसीटीवी कैमरे: पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए लगभग 1500 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनका कंट्रोल रूम इसी नए भवन में होगा।
- हेलीपैड की सुविधा: आपातकालीन स्थितियों और वीआईपी मूवमेंट के लिए भवन के समीप ही एक स्थायी हेलीपैड बनाने की योजना है, जिसका सर्वे कार्य पूरा हो चुका है।
- भीड़ नियंत्रण तंत्र: नए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सर्विलेंस सिस्टम का उपयोग किया जाएगा ताकि भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) को बेहतर बनाया जा सके।
2004 में बना था पहला स्थाई भवन
हरिद्वार में हर 12 साल में कुंभ और 6 साल में अर्धकुंभ के साथ-साथ वार्षिक कांवड़ मेले का आयोजन होता है। साल 2000 तक उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहे हरिद्वार में तब तक कोई स्थाई कंट्रोल रूम नहीं था। राज्य गठन के बाद 2004 में तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार ने हर की पैड़ी के पास पहला आधुनिक मेला नियंत्रण भवन बनवाया था। अब दो दशकों बाद इसकी क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सूखी नदी पर पुल से खत्म होगा हादसों का डर
कुंभ की तैयारियों के साथ-साथ स्थानीय बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जा रहा है। खड़खड़ी श्मशान घाट मार्ग पर स्थित सूखी नदी पर अब 13.21 करोड़ रुपये की लागत से 44.80 मीटर लंबा डबल लेन पुल बनाया जाएगा।
- फायदा: बरसात के दौरान सूखी नदी में अचानक पानी आने से अक्सर वाहन बहने की खबरें आती थीं। पुल बनने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इस खतरे से मुक्ति मिलेगी।
अधिकारियों का संकल्प: समय पर पूरा होगा काम
प्रशासन के मुताबिक, मेला नियंत्रण भवन में रंगाई-पुताई और फर्नीचर का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही नई इमारत का निर्माण कार्य भी गति पकड़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2027 के महाकुंभ से पहले सभी बुनियादी ढांचे पूरी तरह तैयार हों ताकि दुनिया भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके।
