
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित नेलांग घाटी से कैलाश मानसरोवर के पौराणिक मार्ग को पुनर्जीवित करने की कोशिशें अब रंग लाने लगी हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए साधु-संतों, गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े पदाधिकारियों ने ‘कैलाश मुक्त यात्रा’ के तहत इस ऐतिहासिक मार्ग को खोलने के लिए हुंकार भरी है। सभी ने एकजुट होकर केंद्र सरकार से ‘नेलांग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर’ बनाने की मांग की है।
शिव-पार्वती चोटी की तलहटी में लिया गया संकल्प
समुद्रतल से करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित नेलांग घाटी में शिव-पार्वती चोटी की तलहटी में एक विशेष गंगा पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान साधु-संतों ने संकल्प लिया कि जब तक यह मार्ग नहीं खुलता, उनका अभियान जारी रहेगा। इस अवसर पर एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भेजकर नेलांग-जादूंग-कैलाश मानसरोवर कॉरिडोर के निर्माण की अपील की जाएगी।
गंगोत्री से शुरू हुई ‘कैलाश मुक्त यात्रा’
पहली बार आयोजित की गई इस ‘कैलाश मुक्त यात्रा’ की शुरुआत काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक और गंगोत्री धाम के दर्शन के साथ हुई। इसके बाद यात्रा दल भारत-चीन सीमा पर स्थित नेलांग पहुंचा। वहां लाल देवता परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मार्ग?
यात्रा का नेतृत्व कर रही साध्वी रेणुका गुरुमां ने बताया कि पौराणिक काल में साधु-संत इसी मार्ग का उपयोग करते थे। उन्होंने इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- प्राचीन सुगम मार्ग: गंगोत्री से नेलांग, जादूंग और अंतिम सीमा झेलूखागा होते हुए तिब्बत जाने का यह सबसे सुगम रास्ता था।
- धार्मिक जुड़ाव: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगोत्री से पशुपतिनाथ मंदिर जाने वाला जल भी इसी मार्ग से ले जाया जाता था।
- व्यापारिक संभावनाएं: 1962 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। इसे खोलने से न केवल तीर्थयात्रा आसान होगी, बल्कि भारत-तिब्बत व्यापार को भी नई संजीवनी मिलेगी।
सरकार से वार्ता और भविष्य की रणनीति
साध्वी रेणुका गुरुमां ने बताया कि इस संबंध में करीब 100 साधु-संतों और आरएसएस के सदस्यों ने मिलकर प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस विषय पर गृह मंत्री अमित शाह से पहले ही वार्ता चल रही है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति को प्रस्ताव सौंपकर चीन सरकार से इस मार्ग को लेकर कूटनीतिक वार्ता करने और जल्द से जल्द कॉरिडोर स्थापित करने का आग्रह किया जाएगा।
नेलांग घाटी में गूंजते ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैलाश मानसरोवर की सुगम यात्रा के लिए अब एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा होने को तैयार है।
