
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने आगामी 28 मई को बकरीद के अवसर पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को त्योहार की शुभकामनाएं देते हुए आपसी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। वहीं, मुख्यमंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार सभी धर्मों और उनकी पूजा पद्धतियों का पूरा सम्मान करती है, लेकिन कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
‘हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता, लेकिन कानून सर्वोपरि’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बयान में कहा कि उत्तराखंड एक शांतिप्रिय राज्य है, जहां सभी धर्मों के लोग आपसी भाईचारे के साथ निवास करते हैं। उन्होंने कहा, “हमें किसी की पूजा पद्धति से कोई आपत्ति नहीं है। हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार पूजा-अर्चना और इबादत करने की पूरी आजादी है। लेकिन यह सब कानून के दायरे में रहकर ही होना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर सरकार की नीति को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि सड़कें आम जनता के आवागमन के लिए होती हैं और वहां किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि से लोगों को असुविधा हो सकती है। सरकार ने सभी से अपील की है कि वे निर्धारित और पारंपरिक धार्मिक स्थलों पर ही नमाज अदा करें।
सुरक्षा और शांति व्यवस्था के कड़े निर्देश
त्योहार के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए राज्य प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। सभी जिलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
‘उत्तराखंड में सब होगा- पूजा भी और नमाज भी’
मुख्यमंत्री धामी ने संदेश देते हुए कहा, “उत्तराखंड में सब होगा- नमाज भी होगी, पूजा भी होगी, लेकिन कानून के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं है।” सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के साथ-साथ नागरिक अनुशासन और कानून का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
