
देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएं अब त;:कनीक और डिजिटल साक्षरता के मामले में पीछे नहीं हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 72 प्रतिशत महिलाओं के पास अब अपना मोबाइल फोन है। पिछले तीन साल के भीतर महिलाओं में मोबाइल का इस्तेमाल 12% तक बढ़ा है। इससे पहले वर्ष 2019 से 2021 के बीच यह आंकड़ा लगभग 61% था।
इस सर्वेक्षण में 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं के स्वास्थ्य, सशक्तीकरण और डिजिटल पहुंच की स्थिति का आकलन किया गया है।
ग्राफिक से समझें उत्तराखंड में महिलाओं का ‘डिजिटल और फाइनेंशियल’ प्रोफाइल
- मोबाइल इस्तेमाल करने वालीं कुल महिलाएं: 72% (3 साल पहले यह आंकड़ा 61% था)
- शहरी क्षेत्रों में मोबाइल की पहुंच: 77.3%
- ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल की पहुंच: 70.4%
- बैंक खातों वाली महिलाएं (वित्तीय समावेशन): 91% (3 साल पहले यह आंकड़ा 80.2% था)
बदलाव की बड़ी बातें: क्यों तेजी से बदल रही है तस्वीर?
- गांव-गांव 5G नेटवर्क: पहाड़ों के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक बेहतर संचार कनेक्टिविटी और 5G सेवाओं के पहुंचने से महिलाओं के लिए सूचनाओं तक पहुंच बेहद आसान हो गई है।
- स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूह (SHG): पर्वतीय क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं स्थानीय उत्पादों का कारोबार कर रही हैं। डिजिटल साक्षरता बढ़ने से वे अपने व्यवसाय को ऑनलाइन प्रमोट भी कर रही हैं।
- आर्थिक रूप से मजबूत हुईं महिलाएं: 91% महिलाओं के बैंक खातों में बचत खाता होना उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करता है। इससे उन्हें सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ (DBT) मिल पा रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत जरिया बना मोबाइल
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल फोन और इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि यह उत्तराखंड की महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है। सुदूर पहाड़ों में बैठी महिलाएं अब घर बैठे स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ले रही हैं और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन करना सीख रही हैं।
