- सीबीएसई दफ्तर का घेराव: कौलागढ़ रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर कांग्रेसियों ने एक घंटे तक किया प्रदर्शन。
- युवाओं के भविष्य का मुद्दा: नीट पेपर लीक, सीबीएसई कॉपियों की जांच और सीयूईटी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर उठाए सवाल।
- धस्माना का आरोप: प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा— परीक्षाओं की पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

देहरादून।नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पेपर लीक, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में विसंगतियों और केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (CUET) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
कौलागढ़ रोड स्थित सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। लगभग एक घंटे तक चले इस घेराव के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
बीजेपी सरकार युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही: सूर्यकांत धस्माना
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (प्रशासन व संगठन) सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार देश के लाखों युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल रही है।
धस्माना ने कहा, “नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा, जिससे देश के होनहार युवा डॉक्टर बनते हैं, उसका पेपर लीक हो जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री को उसी वक्त इस्तीफा दे देना चाहिए था, जब पेपर लीक की पुष्टि हुई थी, लेकिन विडंबना है कि वह अब भी अपने पद पर बने हुए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में परीक्षाओं के आयोजन में पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार एक भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा बिना किसी विवाद के आयोजित कराने में विफल साबित हो रही है।
- सीबीएसई परिणाम में गड़बड़ी: सीबीएसई परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं (कॉपियों) के बदले जाने की शिकायतों के बाद छात्र अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
- सीयूईटी की विफलता: केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (CUET) में हुई अव्यवस्थाओं ने देश की पूरी शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सैन्य मदद की बात स्वीकारोक्ति है कि सिस्टम फेल हो चुका
कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि अब सरकार द्वारा परीक्षाओं के सुरक्षित आयोजन के लिए भारतीय वायु सेना की मदद लेने की बातें कही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में इस बात की स्वीकारोक्ति है कि सिविल प्रशासनिक ढांचा और सरकारी सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, जिसके कारण अब परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए भी सैन्य शक्ति का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने हिस्सा लिया और मांग पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
