
रामनगर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की है। कॉर्बेट नेशनल पार्क के भीतर अगले पर्यटन सीजन से प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इसकी जगह पर्यटकों को कांच की बोतलों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पार्क को पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त बनाया जा सके।
खबर से जुड़े मुख्य बिंदु :
- ऐतिहासिक पहल: कॉर्बेट नेशनल पार्क में अगले पर्यटन सीजन से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पानी की बोतलों पर पूरी तरह पाबंदी लगेगी।
- विकल्प: पर्यटकों को कांच की बोतलों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जाएगा।
- बॉटलिंग प्लांट: इस योजना के लिए कॉर्बेट प्रशासन पार्क परिसर में अपना खुद का वॉटर बॉटलिंग प्लांट स्थापित करेगा।
- रिफंड पॉलिसी: पर्यटकों को कांच की बोतल सुरक्षित वापस लौटाने पर जमा कराई गई जमानत राशि (सिक्योरिटी मनी) वापस मिल जाएगी।
पर्यावरण दिवस पर पार्क निदेशक का बड़ा ऐलान
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने इस नई योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉर्बेट प्रशासन लंबे समय से पार्क को प्लास्टिक-मुक्त क्षेत्र बनाने का प्रयास कर रहा है। वर्तमान में कॉर्बेट के अधिकांश पर्यटन जोन काफी हद तक प्लास्टिक मुक्त हो चुके हैं, लेकिन सफारी के दौरान पर्यटकों द्वारा ले जाई जाने वाली पानी की प्लास्टिक बोतलें अभी भी एक चुनौती बनी हुई थीं। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया है।
कैसे काम करेगा नया ‘डिपॉजिट-रिफंड’ सिस्टम? 3 पॉइंट्स में समझें
- एंट्री गेट पर ही मिलेगी बोतल: पर्यटकों को पार्क के प्रवेश द्वार पर ही कांच की बोतलों में बंद शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
- जमानत राशि (डिपॉजिट): पानी और कांच की बोतल का निर्धारित शुल्क एंट्री गेट पर पर्यटकों से लिया जाएगा। इसमें बोतल के लिए एक रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट शामिल होगा।
- सुरक्षित वापसी पर रिफंड: पर्यटक जंगल सफारी के दौरान कांच की बोतल का इस्तेमाल कर सकेंगे। सफारी समाप्त होने के बाद जब वे बोतल को सुरक्षित रूप से काउंटर पर वापस जमा करेंगे, तो उनकी जमानत राशि उन्हें तुरंत लौटा दी जाएगी।
खुद का बॉटलिंग प्लांट लगाएगा पार्क प्रशासन
निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कॉर्बेट प्रशासन एक वॉटर बॉटलिंग प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है। इस प्लांट में पानी को पूरी तरह फिल्टर और सुरक्षित कर कांच की बोतलों में रिफिल किया जाएगा।
देश के अन्य जंगलों के लिए बनेगा मिसाल
जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। कई बार वन्यजीव प्लास्टिक निगल लेते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है। वन अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से कॉर्बेट के जंगलों में प्लास्टिक कचरे की संभावना शून्य हो जाएगी और यह कदम देश के अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित होगा।
