
नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (MEA) ने निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने शनिवार को जारी अपने एक बयान में तीर्थयात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा पर जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उनका टूर ऑपरेटर पंजीकृत (रजिस्टर्ड) और अधिकृत है या नहीं।
नेपाल में फंसे कई भारतीय नागरिक
मंत्रालय ने परामर्श में कहा, “विदेश मंत्रालय को हाल ही में ऐसे कई भारतीय नागरिकों से सहायता के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जो निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे, लेकिन चीन में प्रवेश के लिए आवश्यक वीजा और परमिट न होने के कारण वे नेपाल में ही फंस गए हैं।” शनिवार देर रात जारी किया गया यह परामर्श विशेष रूप से उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जो निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से इस यात्रा पर जा रहे हैं।
दस्तावेजों के बिना यात्रा शुरू न करने की सलाह
एडवाइजरी में कड़े शब्दों में कहा गया है, “नागरिकों को सलाह दी जाती है कि जब तक पूरी यात्रा के लिए सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्राप्त न हो जाएं, तब तक वे भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें।” इसके साथ ही, विदेश मंत्रालय ने तीर्थयात्रियों को यह भी सत्यापित करने की सलाह दी है कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत रजिस्टर्ड और अधिकृत है।
पांच साल के अंतराल के बाद शुरू हुई थी यात्रा
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अप्रैल में विदेश मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो पारंपरिक मार्गों—उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला के रास्ते आयोजित की जाएगी। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत यह यात्रा पिछले वर्ष करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू की गई थी।
इससे पूर्व, वर्ष 2020 में कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण और बाद में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध के चलते इस यात्रा को निलंबित कर दिया गया था।
