
देहरादून: उत्तराखंड के विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) ने उपभोक्ताओं और उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बेहद महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। लोकपाल डीपी गैरोला ने एक तरफ जहां किरायेदार के बिजली कनेक्शन के अधिकारों को स्पष्ट किया है, वहीं दूसरी तरफ घरों पर लगने वाले रूफटॉप सोलर पावर प्लांट के रखरखाव को लेकर स्थिति साफ की है।
खबर की बड़ी बातें :
- किरायेदारों को राहत: मकान मालिक से कोर्ट केस या विवाद होने पर भी किरायेदार को बिजली कनेक्शन से वंचित नहीं किया जा सकता।
- 3 गुना सुरक्षा राशि: यदि आवश्यक दस्तावेज अधूरे हैं, तो यूपीसीएल उपभोक्ता से तीन गुना सुरक्षा राशि (Security Deposit) लेकर 15 दिन में कनेक्शन देगा।
- सोलर प्लांट पर नियम: रूफटॉप सोलर प्लांट खराब होने या कम बिजली पैदा होने पर यूपीसीएल बिल माफ नहीं करेगा। मेंटेनेंस की पूरी जिम्मेदारी उपभोक्ता की होगी।
मामला 1: कोर्ट केस और एक्सपायर रेंट एग्रीमेंट के बावजूद मिलेगा बिजली कनेक्शन
क्या था मामला?
हरिद्वार की रहने वाली आशा अग्रवाल ने नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। यूपीसीएल (UPCL) ने उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जिस संपत्ति पर वह रह रही हैं, उसके असली मालिक (एक ट्रस्ट) के साथ उनका विवाद कोर्ट में चल रहा है और उनका किराया समझौता (Rent Agreement) भी समाप्त हो चुका है। इसके बाद आशा अग्रवाल ने लोकपाल के समक्ष अपील दायर की।
लोकपाल का फैसला:
सुनवाई के बाद लोकपाल डीपी गैरोला ने यूपीसीएल को आदेश दिया कि वह आवेदक से तीन गुना सुरक्षा राशि (Security Deposit) लेकर 15 दिनों के भीतर नया कनेक्शन जारी करे।
- कानून क्या कहता है? लोकपाल ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 43 और 44 के तहत, किसी भी परिसर का वास्तविक कब्जेदार बिजली आपूर्ति की मांग करने का कानूनी हकदार है। चूंकि कोर्ट ने किरायेदार की बेदखली पर रोक (स्टे) लगा रखी है, इसलिए वह परिसर की वैध कब्जेदार हैं।
- दस्तावेज अधूरे होने पर क्या नियम है? उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के ‘सप्लाई कोड रेगुलेशन 2020’ के तहत, यदि कोई आवेदक मकान मालिक की एनओसी या अन्य आवश्यक दस्तावेज देने में असमर्थ है, तो यूपीसीएल तीन गुना सिक्योरिटी मनी जमा कराकर कनेक्शन दे सकता है।
मामला 2: रूफटॉप सोलर खराब होने पर यूपीसीएल जिम्मेदार नहीं, उपभोक्ता को भरना होगा पूरा बिल
क्या था मामला?
टिहरी गढ़वाल निवासी सुंदर मणि डबराल ने अपनी पत्नी के नाम पर घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का ‘ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्लांट’ लगवाया था। उनका आरोप था कि प्लांट लगाने वाली कंपनी की लापरवाही और खराब सर्विस के कारण इन्वर्टर बार-बार खराब रहा, जिससे सोलर प्लांट मानकों के अनुसार बिजली नहीं बना पाया। इस कारण उन्हें यूपीसीएल की तरफ से भारी-भरकम बिजली का बिल मिला। डबराल ने मांग की थी कि यूपीसीएल इस बिल को माफ करे या इसकी वसूली सोलर लगाने वाली कंपनी से करे।
लोकपाल का फैसला:
लोकपाल डीपी गैरोला ने उपभोक्ता सुंदर मणि डबराल की इस अपील को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोलर प्लांट की कार्यक्षमता या खराबी के लिए यूपीसीएल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
- करार की शर्तें क्या हैं? समझौते के क्लॉज 7.3 के अनुसार, ‘इंटरकनेक्शन पॉइंट’ (जहां से बिजली ग्रिड में जाती है) से पहले लगे पूरे सोलर प्लांट के संचालन, सुरक्षित रख-रखाव और किसी भी प्रकार की खराबी को दूर करने की पूरी जिम्मेदारी केवल और केवल उपभोक्ता की होती है।
- क्या करना होगा? लोकपाल ने कहा कि यूपीसीएल यह जांचने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है कि उपभोक्ता का सोलर प्लांट पूरी क्षमता से चल रहा है या नहीं। यह विवाद उपभोक्ता और सोलर कंपनी के बीच का है। इसलिए उपभोक्ता को अपना बकाया बिजली बिल हर हाल में चुकाना होगा।
