
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़, विशेष रूप से धारचूला और उससे लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रहे भूस्खलन (landslides) के कारण चीन सीमा को जोड़ने वाला मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है, जिससे क्षेत्र के करीब 50 से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय धारचूला से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
खबर की बड़ी बातें :
- चीन सीमा मार्ग ठप: धारचूला और सीमा क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश से मुख्य हाईवे बंद, 50 गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूटा।
- यात्री फंसे: आदि कैलाश यात्रा पर निकले श्रद्धालु रास्ते में अटके, दारमा और व्यास घाटी जाने वाले वाहनों को तवाघाट में रोका गया।
- पैदल पुल बहा: घटखोला से सीनियाखोला को जोड़ने वाला पैदल पुल नदी के तेज बहाव में बह गया।
- 13 सड़कें बंद: पिथौरागढ़ जिले में कुल 13 मार्ग (1 नेशनल हाईवे और 12 ग्रामीण मोटर मार्ग) मलबा आने से बंद हैं।
- भारी बारिश का रिकॉर्ड: क्षेत्र में बीते 24 घंटों में 82 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश यात्रा प्रभावित
भारी बारिश और पहाड़ियों से लगातार पत्थर गिरने के कारण सीमांत इलाकों में भय का माहौल है। तवाघाट-लिपुलेख (कैलास मानसरोवर) मार्ग कई स्थानों पर लैंडस्लाइड के चलते बंद हो गया है। इसके अलावा तवाघाट-सोबला-तिदांग सीमा मार्ग पर भी चार से पांच स्थानों पर भारी मलबा आने से चीन सीमा की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है।
इस भूस्खलन की वजह से आदि कैलाश यात्रा पर निकले श्रद्धालु भी रास्ते में फंस गए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दारमा और व्यास घाटी की ओर जाने वाले कई वाहनों को तवाघाट क्षेत्र में ही रोक दिया है।
पैदल पुल बहा, थल-मुनस्यारी समेत 13 मार्ग बंद
बारिश का कहर केवल राष्ट्रीय और सीमांत राजमार्गों तक सीमित नहीं रहा। धारचूला तहसील के अंतर्गत घटखोला से सीनियाखोला को जोड़ने वाला एक पैदल पुल नदी के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 13 मार्ग बंद पड़े हैं। इनमें मुख्य मार्ग निम्नलिखित हैं:
- थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग: किलोमीटर 166 पर मार्ग अवरुद्ध है।
- गिनीबैंड-समकोट मार्ग: किलोमीटर 9 पर बंद।
- अन्य ग्रामीण मार्ग: तवाघाट-थानीधार, डुंगरी-वासूड़ी, बजने-टोली-सितोनिया, तपोवन-गर्बी, सोरना-सिरौं, मटलोट-दारमा, मनसुरी-कांडा, कालिका-खुर्मी, गलाती-गुमती और चौरासांग-थानीगांव मोटर मार्ग भी मलबे की चपेट में हैं।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत आने वाले देवीबगड़-खेतकन्याला गधेरी मार्ग का एक हिस्सा भी पहले हुए वॉशआउट के बाद से बंद पड़ा है, जिससे दूरस्थ गांवों के लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
प्रशासन और राहत एजेंसियों की कोशिशें जारी
सीमांत जनपद में बिगड़े हालातों को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), पीएमजीएसवाई और लोक निर्माण विभाग की टीमें भारी मशीनों (जेसीबी और पोकलैंड) के साथ बंद रास्तों को खोलने में जुटी हुई हैं। शनिवार दोपहर तक अधिकांश बंद मार्गों को खोलने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई संवेदनशील स्थानों पर लगातार गिरते पत्थरों और मलबे के कारण काम में बाधा आ रही है।
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ घंटों में क्षेत्र में और भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके कारण राहत कार्यों में अधिक समय लग सकता है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से बिना किसी आवश्यक कार्य के यात्रा न करने और संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी सावधानी बरतने की अपील की है।
