
देहरादून। उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व (RTR) से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर हाथियों और अन्य वन्यजीवों को ट्रेन हादसों से बचाने के लिए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। रिजर्व प्रशासन ने रेलवे ट्रैक पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम’ (Intrusion Detection System – IDS) स्थापित करने की तैयारी को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है।
इस सुरक्षा प्रणाली को धरातल पर उतारने के लिए जल्द ही राज्य वन्यजीव बोर्ड (स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड) और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड) से आवश्यक स्वीकृतियां ली जाएंगी। मंजूरी मिलते ही रेलवे ट्रैक पर इस तकनीक को स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
कैसे काम करती है यह आधुनिक तकनीक?
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह रेलवे ट्रैक के आसपास होने वाली गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नज़र रखती है।
- ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): इसके तहत रेलवे ट्रैक के समानांतर जमीन के भीतर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाती है।
- कंपन और हलचल की पहचान: जब भी कोई भारी वन्यजीव ट्रैक के आसपास से गुजरता है, तो यह केबल जमीन में होने वाले कंपन और हलचल को महसूस करती है।
- AI द्वारा विश्लेषण: प्राप्त संकेतों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सिस्टम विश्लेषित करता है और यह पुष्टि करता है कि हलचल किसी वन्यजीव (जैसे हाथी) की है या नहीं।
- तत्काल अलर्ट: वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि होते ही सिस्टम तुरंत वन विभाग और रेलवे के संबंधित अधिकारियों के मोबाइल और नियंत्रण कक्ष में अलर्ट भेज देता है, जिससे समय रहते ट्रेन की गति को धीमा किया जा सके या रोका जा सके।
मोतीचूर रेंज में सफल रहा परीक्षण
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक का जमीनी परीक्षण (ट्रायल) पहले ही राजाजी के मोतीचूर क्षेत्र में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इस परीक्षण के दौरान पालतू हाथियों को रेलवे ट्रैक के आसपास लाया गया था ताकि यह जांचा जा सके कि सिस्टम कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है।
परीक्षण के परिणाम सकारात्मक रहे। जैसे ही हाथी ट्रैक के करीब पहुंचे, सिस्टम ने बिना किसी देरी के उनकी गतिविधि को भांप लिया और अधिकारियों तक तुरंत संदेश पहुंचा दिया। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस सफल परीक्षण से अब इसे स्थायी रूप से लागू करने की राह आसान हो गई है।
वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी का इंतजार
इस परियोजना को लेकर वन विभाग और भारतीय रेलवे के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। दोनों विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि संचालन में कोई बाधा न आए।
“इन्ट्यूशन डिटेक्शन सिस्टम को लगाने का प्रस्ताव पूरी तरह तैयार है और इस पर आवश्यक होमवर्क किया जा चुका है। मोतीचूर रेंज में किया गया प्रयोग सफल रहा है। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।”— कोको रोसे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व
असम और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर तैयारी
हाथियों की सुरक्षा के लिए इस एआई-आधारित तकनीक का उपयोग देश के अन्य राज्यों जैसे असम और पश्चिम बंगाल के संवेदनशील रेलवे ट्रैकों पर पहले से किया जा रहा है। वहां इस तकनीक के कारण ट्रेन हादसों में होने वाली हाथियों की मौतों में भारी कमी दर्ज की गई है। इसी सफलता को देखते हुए उत्तराखंड वन विभाग भी इसे राजाजी टाइगर रिजर्व में लागू कर रहा है।
राजाजी टाइगर रिजर्व हाथियों का एक प्रमुख प्राकृतिक गलियारा (कॉरिडोर) है। इस तकनीक के लागू होने से न केवल हाथियों बल्कि अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
