
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से पहाड़ी इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश और भूस्खलन के चलते प्रदेशभर में कुल 72 सड़कें ठप पड़ी हैं। इनमें 3 राज्य राजमार्ग, 1 प्रमुख जिला मार्ग (MDR), 1 बीआरओ मार्ग, 20 लोक निर्माण विभाग (PWD) की और 47 पीएमजीएसवाई व ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। सबसे ज्यादा 14 सड़कें अकेले पिथौरागढ़ जिले में बंद हैं।
पहाड़ों पर आफत बनी बारिश, इन जिलों में सबसे बुरा हाल
सड़कें बंद होने से पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही ठप हो गई है। चमोली में 11, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में 10-10, बागेश्वर में 8, देहरादून में 7, टिहरी में 6, पौड़ी में 3, अल्मोड़ा में 2 और नैनीताल में 1 सड़क पर यातायात बाधित है। मार्गों को साफ करने के लिए प्रशासन की मशीनें और टीमें जुटी हैं, लेकिन लगातार गिर रहे मलबे और बोल्डर राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बन रहे हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का असर साफ देखा जा रहा है। उत्तरकाशी के भटवाड़ी में 66 मिमी, रुद्रप्रयाग के जखोली में 87 मिमी, पिथौरागढ़ के डीडीहाट में 35.6 मिमी व धारचूला में 35.4 मिमी, पौड़ी के लैंसडाउन में 35 मिमी, बागेश्वर के कपकोट में 22 मिमी, अल्मोड़ा के चौखुटिया में 23 मिमी और देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में 21.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
भूस्खलन से नेशनल हाईवे भी प्रभावित
बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। रुद्रप्रयाग में ऋषिकेश-केदारनाथ हाईवे पर पालीगढ़ और सिलाईबैंड के पास मलबा आने से कुछ देर के लिए यातायात रुका, जिसे बाद में सुचारु कर दिया गया। इसी तरह उत्तरकाशी में ऋषिकेश-यमुनोत्री हाईवे पर भी मलबा आने से मार्ग बाधित हुआ, जिसे प्रशासन ने कुछ ही घंटों में खुलवा लिया। हालांकि, अंदरूनी और ग्रामीण सड़कें अब भी बंद होने से लोगों को मीलों का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।
बिजली-पानी और हादसों का दौर
बारिश सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं पर भी भारी पड़ी है। चमोली के जोशीमठ में फीडर खराब होने और उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र में तकनीकी खराबी से कई गांवों की बिजली गुल है। वहीं, रुद्रप्रयाग के जखोली में पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से जलापूर्ति प्रभावित हुई है।
बीते 24 घंटों के दौरान कुछ दर्दनाक घटनाएं भी सामने आई हैं। ऊधमसिंह नगर के नानकमत्ता में एक व्यक्ति की नदी में डूबने से मौत हो गई, जबकि बागेश्वर में सरयू नदी में बहे 8 साल के बच्चे का शव बरामद किया गया। रुद्रप्रयाग में एक श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर उसे एयरलिफ्ट कर देहरादून भेजा गया, वहीं एक सड़क हादसे में तीन लोग घायल हो गए। देहरादून में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना भी हुई।
नदियां खतरे के निशान से नीचे, प्रशासन अलर्ट
राहत की बात यह है कि लगातार बारिश के बावजूद प्रदेश की प्रमुख नदियां—अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी, गंगा, काली, सरयू और शारदा—फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हालांकि, जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग के आगामी दिनों में भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और पहाड़ी रास्तों पर पूरी सतर्कता बरतने की अपील की है।
