
हल्द्वानी (उत्तराखंड): उत्तराखंड के जंगलों से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। हल्द्वानी वन प्रभाग की छकाता रेंज में दो युवा नर बाघों के बीच अपने क्षेत्र (टेरिटरी) पर कब्जे को लेकर ऐसा खूनी संघर्ष हुआ कि दोनों की ही जान चली गई। दोनों बाघों के शव एक-दूसरे से महज 20 मीटर की दूरी पर मिले हैं। उत्तराखंड के वन्यजीव इतिहास में संभवतः यह पहला मामला है जब आपसी जंग में एक साथ दो बाघों की मौत हुई हो।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार रात सिमलिया के जंगलों से लगातार बाघों के भीषण संघर्ष और भयानक दहाड़ की आवाजें आती रहीं। देर रात अचानक जंगल में सन्नाटा छा गया। रविवार सुबह जब ग्रामीण जंगल की तरफ गए तो दृश्य देखकर सन्न रह गए। जंगल के भीतर करीब एक किलोमीटर अंदर दोनों बाघ मृत पड़े थे और आसपास काफी मात्रा में खून बिखरा हुआ था। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी।
गर्दन और जांघ की मुख्य नस फटने से हुई मौत
सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी, पशु चिकित्सकों की टीम और विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर पंजों के गहरे निशान और घसीटे जाने के सबूत मिले हैं।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के शुरुआती संकेत: एक बाघ की गर्दन की मुख्य नस और दूसरे बाघ की जांघ की मुख्य नस बुरी तरह कट गई थी, जिससे अत्यधिक खून बहने के कारण दोनों ने दम तोड़ दिया।
- अधिकारियों के अनुसार दोनों बाघों के शरीर के सभी अंग, पंजे और नाखून पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे अवैध शिकार (पोचिंग) की बात से साफ इनकार किया गया है। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई है और डीएनए सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं बाघों के आपसी संघर्ष?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड में संरक्षण प्रयासों के चलते बाघों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। बाघों का दायरा अब मैदानी इलाकों से निकलकर पहाड़ी क्षेत्रों की ओर भी फैल रहा है। सीमित जंगल और बढ़ती आबादी के कारण युवा नर बाघों के बीच अपना अलग इलाका (टेरिटरी) बनाने के लिए संघर्ष तीखे हो गए हैं।
अधिकारी का बयान:“प्रथम दृष्टया यह मामला दो नर बाघों के बीच आपसी वर्चस्व (Territorial Fight) की खूनी जंग का लग रहा है। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर फॉरेंसिक सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।”— कुंदन कुमार, डीएफओ (हल्द्वानी वन प्रभाग)
