- हाईकोर्ट के निर्देश: पर्यटन नगरी को ध्वनि प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन का बड़ा फैसला।
- सड़क पर उतरी टीम: पुलिस, प्रशासन और आरटीओ की संयुक्त टीम ने मॉल रोड पर चलाया जागरूकता अभियान।
- स्थानीय लोगों की चिंता: कहा- बिना हॉर्न के पैदल चलने वाले कैसे हटेंगे? हादसों का खतरा बढ़ेगा।

नैनीताल । सरोवर नगरी नैनीताल घूमने आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को अब प्रसिद्ध मॉल रोड पर गाड़ियों के हॉर्न की ‘पीं-पीं’ सुनाई नहीं देगी। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने नैनीताल की मॉल रोड को पूरी तरह से ‘नो हॉर्न जोन’ घोषित कर दिया है। अब इस रोड पर किसी भी वाहन का हॉर्न बजाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
इस नई व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त टीम ने शनिवार को मॉल रोड पर विशेष अभियान चलाया। इस दौरान वाहन चालकों को अनावश्यक हॉर्न न बजाने के लिए जागरूक किया गया और चेतावनी दी गई कि नियम तोड़ने पर सख्त चालानी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का तर्क: शांत वातावरण बनाए रखना जरूरी
“अनावश्यक शोर से पहचान खो रहा था शहर””नैनीताल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहाँ लोग शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आते हैं। लंबे समय से गाड़ियों के अनावश्यक हॉर्न के कारण पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही थी। शहर की शांत पहचान को बरकरार रखने के लिए यह फैसला लिया गया है।”— नवाजिश खालिक, एसडीएम (नैनीताल)
“सख्ती से होगा चालान””प्रशासनिक निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा। मॉल रोड पर चेकिंग अभियान जारी रहेगा और जो भी वाहन चालक हॉर्न बजाता पाया जाएगा, उसके खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाएगी।”— जगदीश चंद्र, एसपी सिटी
वहीं, आरटीओ गुरुदेव सिंह ने भी वाहन चालकों से अपील की कि वे नियमों का पालन करते हुए नैनीताल को शांत और स्वच्छ पर्यटन नगरी बनाए रखने में सहयोग करें।
फैसले पर उठा विरोध: ‘बिना हॉर्न के कैसे टलेंगे हादसे?’
एक तरफ जहां प्रशासन इसे शहर के हित में बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग इस फैसले से खासे नाराज नजर आ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों और चालकों का तर्क है कि मॉल रोड पर हमेशा पर्यटकों और पैदल चलने वाले लोगों की भारी भीड़ रहती है। यदि गाड़ियाँ हॉर्न नहीं बजाएंगी, तो लोग सड़क से दूर कैसे हटेंगे? लोगों का कहना है कि इस फैसले से शहर में हादसों का खतरा काफी बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस नियम के व्यावहारिक पहलुओं पर पुनः ध्यान देने की मांग की है।
