
चमोली :उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) में इस साल पर्यटकों की रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ रही है। महज दो महीने (1 जून से 2 अगस्त) के भीतर ही 17 हजार से ज्यादा सैलानी घाटी के दीदार के लिए पहुंच चुके हैं। इस आंकड़े ने पिछले पूरे सीजन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
घाटी में उमड़ रही सैलानियों की भीड़ और पहाड़ी वादियों के खुशनुमा मौसम के कारण स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं।
खबर के मुख्य बिंदु :
- नया रिकॉर्ड: 1 जून से 2 अगस्त के बीच पहुंचे 17,060 सैलानी; पिछले साल पूरे सीजन (5 महीने) में 15,924 पर्यटक आए थे।
- राजस्व: पार्क प्रशासन को अब तक ₹31.52 लाख से अधिक की कमाई हुई।
- फ्लावरिंग पीक: अगस्त शुरू होते ही बामन धोड से रिवर व्यू प्वाइंट तक दुर्लभ अल्पाइन फूलों से महकी घाटी।
दो महीने में तोड़ा बीते पूरे सीजन का रिकॉर्ड
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की रेंज ऑफिसर चेतना काण्डपाल ने बताया कि पार्क खुलने (1 जून) से लेकर 2 अगस्त तक 16,970 भारतीय और 90 विदेशी पर्यटकों सहित कुल 17,060 सैलानी फूलों की घाटी का दीदार कर चुके हैं। इससे पार्क प्रशासन को 31,52,300 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
पिछले साल (2025) के आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जून से 31 अक्टूबर तक के पूरे सीजन में कुल 15,924 पर्यटक (15,508 भारतीय और 416 विदेशी) ही पहुंचे थे, जिससे 33.28 लाख रुपये का राजस्व मिला था। इस बार महज दो महीने में ही पर्यटकों की संख्या पिछले पूरे साल से अधिक हो गई है, जबकि अभी पूरा सीजन बाकी है।
अगस्त शुरू होते ही फ्लावरिंग सीजन चरम पर
उच्च हिमालयी भ्यूंडार वैली में स्थित यह घाटी अगस्त का महीना शुरू होते ही अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आ रही है। बामन धोड से लेकर रिवर व्यू प्वाइंट तक पूरी घाटी रंग-बिरंगे अल्पाइन और दुर्लभ हिमालयी फूलों से सजी हुई है।
इन दिनों घाटी में जेरेनियम, पोटेंटिला, मोरिना लोंगिफोलिया, बाल्सम, गुलमेहंदी, रत्नज्योति, लिगुलरिया, एरीगरॉन, सेनिसिओ, क्रीमंथोडियम और एपिलोबियम प्रजाति के फूलों की भरमार है, जिनकी खुशबू प्रकृति प्रेमियों को खूब लुभा रही है।
2005 में मिला था अलग नेशनल पार्क का दर्जा
विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी अपने अनूठे प्राकृतिक सौंदर्य और हजारों प्रजातियों के दुर्लभ फूलों के लिए जानी जाती है। साल 2005 में इसे नंदा देवी नेशनल पार्क से अलग कर स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय उद्यान’ का दर्जा दिया गया था और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
