
- विपक्षी हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा और राज्यसभा से ध्वनि मत से पारित हुआ विधेयक
- 2 साल से ज्यादा देरी पर अब कलेक्टर या एसडीएम के बजाय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश होगा अनिवार्य
- फर्जी वोटर बनने और तुष्टीकरण की राजनीति रोकने के लिए कड़े किए गए नियम: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय
- राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ेंगे पासपोर्ट, आधार, वोटर कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस; फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
नई दिल्ली | संसद के दोनों सदनों ने विपक्षी सदस्यों की भारी नारेबाजी और हंगामे के बीच ध्वनि मत से ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी और केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित किए जाने के बाद यह नया कानून देशभर में लागू हो जाएगा।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य 1969 के मूल कानून के प्रावधानों को सख्त बनाना और समय पर जन्म व मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए नागरिकों को प्रोत्साहित करना है। नए संशोधनों के बाद, देरी से कराए जाने वाले पंजीकरणों पर कड़ी अदालती निगरानी रहेगी।
वर्तमान में एक वर्ष से अधिक की देरी होने पर उप-जिलाधिकारी (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की अनुमति से रजिस्ट्रेशन हो जाता था। अब तीन श्रेणियों में नए नियम लागू होंगे:
- 30 दिन से 1 वर्ष के भीतर देरी: जिला रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति, स्व-सत्यापित दस्तावेज (Self-attested documents) और निर्धारित शुल्क देना होगा।
- 1 से 2 वर्ष तक की देरी: राज्य सरकार के अधीन आने वाले कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की जांच और लिखित आदेश के बाद ही रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।
- 2 वर्ष से अधिक की देरी: अब कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय मामला न्यायपालिका के पास जाएगा। इसके लिए हाई कोर्ट के अधीन काम करने वाले प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) के स्पष्ट आदेश की आवश्यकता होगी।
केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु के राष्ट्रीय डेटाबेस को डिजिटल रूप में वैधानिक दर्जा दिया है। इस एकल दस्तावेज (Single Document) का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जा सकेगा:
- स्कूलों व शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश
- ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जारी कराने में
- मतदाता सूची (Voter List) में नाम दर्ज कराने में
- विवाह पंजीकरण, आधार कार्ड और सरकारी नौकरियों के आवेदन में
“मृत व्यक्ति को फर्जी वोटर बनाकर तुष्टीकरण की राजनीति रोकेंगे’“मोदी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश में जन्मे हर बच्चे का पंजीकरण हो और हर मृत्यु का सही रिकॉर्ड दर्ज हो। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मृत व्यक्ति फर्जी वोटर बनकर तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दलों को अनुचित लाभ न पहुंचा सकें। कांग्रेस ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नाम पर देश को धोखे में रखा।”— नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री
बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि देश में 2014 में जन्म पंजीकरण 86.6% था, जो अब बढ़कर 99% से अधिक हो गया है। हालांकि, देरी से होने वाले पंजीकरणों का दुरुपयोग कर कई बार फर्जी दस्तावेज और पहचान बनाने की कोशिशें की जाती हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच अनिवार्य होने से फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से नकेल कसेगी और समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा।
