- गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों और स्वरोजगार के प्रयासों को साझा करने पर जोर
- सितंबर में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली में आयोजित होंगी प्रवासी पंचायतें
- योजनाओं का लाभ लेने के लिए बैंकों व दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, प्रक्रियाएं होंगी सरल: मुख्यमंत्री

देहरादून (राज्य ब्यूरो):
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और ‘रिवर्स पलायन’ (गांव वापसी) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार हर जिले में ‘प्रवासी पंचायत’ का आयोजन करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित ‘ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग’ की बैठक में यह निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव लौटे प्रवासी उत्तराखंडियों द्वारा स्वरोजगार के क्षेत्र में किए गए कार्यों व उनके अनुभवों को साझा किया जाए, ताकि अन्य लोग भी इससे प्रेरित हों। साथ ही, प्रवासियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिए जिला स्तर पर प्रवासी पंचायतें निरंतर आयोजित की जाएं। उन्होंने अधिकारियों को पलायन निवारण आयोग के सभी सुझावों पर गंभीरता से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
सितंबर में तीन और जिलों में होंगी प्रवासी पंचायतें
बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी ने बताया कि अब तक टिहरी, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ और पौड़ी जिले में प्रवासी पंचायतों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इसके अगले चरण में आगामी सितंबर माह में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में प्रवासी पंचायतें आयोजित की जाएंगी। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और रिवर्स पलायन को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।
योजनाओं की प्रक्रिया हो सरल, गांव स्तर तक पहुंचे जानकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार व आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी आसान भाषा में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा, “ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी दफ्तरों या बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए सभी प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और योजनाओं की पहुंच सीधे गांव स्तर तक सुनिश्चित की जाए।”
स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और युवाओं को गांव में ही रोजगार
सीएम ने जोर देकर कहा कि रिवर्स पलायन केवल नौकरी देने से नहीं, बल्कि गांवों में बेहतर आजीविका, बुनियादी सुविधाएं और नए अवसर विकसित करने से ही संभव होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
- स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और कौशल को रोजगार से जोड़कर युवाओं को गांव में ही आजीविका दी जाए।
- स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें बड़े बाजार उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक में ये रहे मौजूद:
इस उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली, रंजना रावत, शासन के सचिव धीराज गर्ब्याल, डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अहमद इकबाल तथा अपर सचिव सौरभ गहरवार, अनुराधा पाल और संतोष बडोनी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
