- मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहा चार मंजिला सब-जिला अस्पताल, 31 अगस्त तक काम पूरा करने की डेडलाइन
- आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, अल्ट्रासाउंड और लिफ्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा लैस
- उच्च हिमालयी क्षेत्र में तीर्थयात्रियों को मिलेगी त्वरित व बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा
गोपेश्वर:विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में तीर्थयात्रियों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत धाम में बनाए जा रहे 45 बेड के अत्याधुनिक चार मंजिला अस्पताल का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस अस्पताल को सब-जिला अस्पताल (Sub-District Hospital) के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कार्यदायी संस्था को हर हाल में आगामी 31 अगस्त तक निर्माण कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
यह नया चार मंजिला अस्पताल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से युक्त होगा। यहां डिजिटल एक्स-रे, अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OT) और गहन चिकित्सा इकाई (ICU) की सुविधा मिलेगी। अस्पताल भवन में गंभीर मरीजों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए लिफ्ट की भी व्यवस्था की गई है। अधिकांश आधुनिक चिकित्सा उपकरण अस्पताल पहुंच चुके हैं और उनके इंस्टॉलेशन का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की संभावना
सूत्रों के अनुसार, आगामी अक्तूबर माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बदरीनाथ धाम पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। पीएम के संभावित दौरे को ध्यान में रखते हुए शासन-प्रशासन और पीएमओ स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभावना जताई जा रही है कि दौरे के दौरान प्रधानमंत्री इस आधुनिक अस्पताल का लोकार्पण कर सकते हैं।
हालांकि, जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर अभी आधिकारिक प्रोटोकॉल प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजीव पाल ने बताया कि अक्तूबर में प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए अस्पताल भवन और मशीनों को स्थापित करने का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द अस्पताल का संचालन शुरू किया जा सके।
सांस व ऑक्सीजन संकट से जूझने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत
उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ धाम में कई श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की कमी, सांस लेने में तकलीफ और ‘हाई एल्टीट्यूड सिकनेस’ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब तक गंभीर मामलों में मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जोशीमठ, गोपेश्वर या श्रीनगर जैसे निचले क्षेत्रों में रेफर करना पड़ता था, जिसमें काफी समय बर्बाद होता था। इस आधुनिक अस्पताल के शुरू होने से तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को धाम में ही समय पर जीवनरक्षक और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
