Chardham Yatra 2025: बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में अब पॉलिथीन पर प्रतिबंध, प्रसाद के लिए जूट और कपड़े के बैग का होगा उपयोग।मंदिर समिति के मां चंद्रबदनी मंदिर यात्री विश्राम गृह में स्वयंसेवी संस्था सरस्वती जनकल्याण एवं स्वरोजगार संस्थान समिति के कर्मचारियों को प्रसाद के बॉक्स व थैलियां बनाने का प्रशिक्षण दे रहा है।

देहरादून: बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में अब पॉलिथीन का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके स्थान पर श्रद्धालुओं को जूट और कपड़े के बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। मंदिर समिति ने यह सुनिश्चित किया है कि दोनों धामों में प्रसाद भी इन्हीं पर्यावरण अनुकूल बैग में दिया जाएगा। इस पहल के तहत बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने देहरादून में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें इन बैगों के निर्माण की प्रक्रिया सिखाई जा रही है।
स्वयंसेवी संस्था कर रही सहयोग
मंदिर समिति के मां चंद्रबदनी मंदिर यात्री विश्राम गृह में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। इसमें स्वयंसेवी संस्था सरस्वती जनकल्याण एवं स्वरोजगार संस्थान समिति के कर्मचारियों को प्रसाद के लिए विशेष बॉक्स और थैलियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हिमालयी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
गुरुवार को बीकेटीसी के अधिशासी अभियंता अनिल ध्यानी ने प्रशिक्षण कार्यशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में प्रसाद के लिए जूट और कपड़े के बैग को बढ़ावा देने से तीर्थ यात्री पॉलिथीन का उपयोग नहीं करेंगे, जिससे हिमालयी पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण से बीकेटीसी कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी विकसित होगी और आगे भी इस तरह के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान बीकेटीसी कर्मचारी संघ अध्यक्ष विजेंद्र बिष्ट भी मौजूद रहे।
20 मार्च को शुरू हुई कार्यशाला
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने जानकारी दी कि बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने 20 मार्च को इस कार्यशाला का शुभारंभ किया था। निरीक्षण के दौरान सरस्वती स्वरोजगार संस्थान के अध्यक्ष प्रदीप डोभाल, संरक्षक एडी डोभाल, प्रशिक्षक रंजना गिरी, खुशबू, निधि प्रजापति, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल और प्रबंधक किशन त्रिवेदी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पर्यावरण के अनुकूल पहल
चारधाम यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, जिससे भारी मात्रा में पॉलिथीन कचरा उत्पन्न होता है। मंदिर समिति की इस पहल से पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, जूट और कपड़े के बैग से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
चारधाम यात्रा के दौरान इस नई व्यवस्था का पालन करना सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य होगा।