
नई दिल्ली: कृषि और डेयरी क्षेत्र ने जीएसटी (GST) कानून के ढांचे में किए गए नवीनतम बदलावों की जमकर सराहना की है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने प्रमुख कृषि इनपुट और डेयरी उत्पादों पर जीएसटी दरों को कम करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। इसे बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितताओं से जूझ रहे किसानों के लिए एक बड़ी राहत और दिवाली का तोहफा माना जा रहा है।
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए इन फैसलों से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी पौष्टिक भोजन अधिक किफायती दरों पर उपलब्ध हो सकेगा।
किन चीजों पर मिलेगी राहत?
जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी गई है।
- कृषि उपकरण: ट्रैक्टर, टायर, सिंचाई मशीन, खाद बनाने की मशीन पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
- उर्वरक और कीटनाशक: सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया जैसे प्रमुख उर्वरक कच्चे माल पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इसके अलावा, विभिन्न जैव-कीटनाशकों पर भी जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- डेयरी उत्पाद: अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) दूध को टैक्स-मुक्त कर दिया गया है।वहीं, कंडेंस्ड दूध, मक्खन, घी और पनीर पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
उद्योग जगत ने किया फैसले का स्वागत
गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के सीईओ और एमडी सुनील कटारिया के अनुसार, उर्वरकों और जैव कीटनाशकों पर जीएसटी में कमी से किसानों को ऐसे समय में “बड़ी राहत” मिलेगी, जब कृषि फसलें अनियमित मौसम के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा, “खेती की कुल लागत में औसतन 30-40% हिस्सा इनपुट लागत का होता है, इन लागतों को कम करने से गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा समाधानों की पहुंच बढ़ेगी, जिससे किसानों को उपज बढ़ाने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।”
किसानों और उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा फायदा?
इन बदलावों का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ेगा। ट्रैक्टर, खाद और कीटनाशकों के सस्ते होने से खेती की कुल लागत घटेगी, जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।
वहीं, आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह एक अच्छी खबर है। दूध, दही, पनीर और मक्खन जैसे रोजमर्रा के डेयरी उत्पाद सस्ते होंगे, जिससे घर का बजट हल्का होगा। मदर डेयरी जैसी प्रमुख कंपनियों ने भी कहा है कि वे जीएसटी कटौती का लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंचाएंगी। यह कदम त्योहारों के मौसम से ठीक पहले आया है, जिससे आम लोगों को महंगाई से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
