
देहरादून | उत्तराखंड में मौसम के दो अलग-अलग मिजाज देखने को मिल रहे हैं। जहां एक ओर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई हल्की बर्फबारी ने ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं मैदानी इलाकों में ‘सूखी ठंड’ और कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित किया है। बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब जैसी ऊंची चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है, जिससे पूरी घाटी में शीत लहर का प्रकोप तेज हो गया है।
मैदानों में कोहरे का ‘येलो अलर्ट’
मौसम विभाग ने राज्य के मैदानी जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि, देहरादून जैसे क्षेत्रों में रविवार को मौसम विभाग का पूर्वानुमान सटीक नहीं बैठा और वहां दिनभर चटख धूप खिली रही, जिससे तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कोहरे के कारण सुबह के समय यातायात और विज़िबिलिटी पर बुरा असर पड़ रहा है।
पर्यावरण और जल संकट की आहट
जनवरी के महीने में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होना पर्यावरणविदों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कमजोर पड़ने से प्रदेश इस समय ‘सूखी ठंड’ की चपेट में है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि:
- ग्लेशियरों पर संकट: नाममात्र की बर्फबारी से ग्लेशियरों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।
- जल स्रोत: पर्याप्त हिमपात न होने से पहाड़ के प्राकृतिक जल स्रोत (धारे और नौले) रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं, जिससे गर्मियों में भारी जल संकट पैदा हो सकता है।
खेती और सेहत पर दोहरी मार
शुष्क मौसम का सीधा असर उत्तराखंड की आर्थिकी और सेहत पर पड़ रहा है:
- बागवानी: बर्फबारी में देरी के कारण सेब के बागानों को जरूरी ‘चिलिंग ऑवर’ नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता गिर सकती है।
- खेती: रबी की फसलों (गेहूं और सरसों) को नमी न मिलने से विकास रुक गया है।
- स्वास्थ्य: नमी की कमी और सूखी ठंड के कारण अस्पतालों में वायरल और फ्लू के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
आगामी पूर्वानुमान: 21 जनवरी से बदल सकता है मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 21 से 24 जनवरी के बीच एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ राज्य में दस्तक दे सकता है। इससे उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर अच्छी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश की उम्मीद है। यदि यह सिस्टम सक्रिय होता है, तो कृषि और पर्यटन क्षेत्र को बड़ी संजीवनी मिलेगी।
