
कर्णप्रयाग/चमोली: उत्तराखंड की आस्था के सबसे बड़े प्रतीक और ‘हिमालयी महाकुंभ’ के नाम से प्रसिद्ध श्रीनंदा देवी राजजात 2026 को आधिकारिक रूप से स्थगित कर दिया गया है। रविवार को कर्णप्रयाग में आयोजित श्रीनंदा देवी राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। अब इस यात्रा के आगामी वर्ष (संभावित 2027) में आयोजन की घोषणा वसंत पंचमी के पावन अवसर पर की जाएगी।
क्यों टाली गई विश्व प्रसिद्ध राजजात यात्रा?
समिति के अध्यक्ष और कांसुवा के राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्थगन के पीछे चार मुख्य कारण बताए गए हैं:
- मलमास और मौसम का संकट: इस वर्ष मई-जून में मलमास होने के कारण गणना के अनुसार होमकुंड में पूजा की तिथि 20 सितंबर के आसपास पड़ रही है। सितंबर के अंत में हिमालयी बुग्यालों में बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिससे हजारों तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा अत्यंत जोखिम भरी और कठिन हो सकती है।
- प्रशासन का पुनर्विचार पत्र: चमोली जिला प्रशासन ने समिति को पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। वर्ष 2025 में देवाल, थराली और नंदानगर ब्लॉक में भारी बारिश और बादल फटने से भारी तबाही हुई थी, जिसके पुनर्निर्माण कार्य अभी भी जारी हैं।
- ढांचागत सुविधाओं का अभाव: राजजात के कठिन पड़ावों पर अभी तक यात्रियों के रुकने और अन्य बुनियादी सुविधाओं का ढांचा तैयार नहीं हो पाया है।
- जनसुरक्षा सर्वोपरि: समिति ने माना कि निर्जन क्षेत्रों में आपदा की संभावना और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वर्तमान परिस्थितियों में यात्रा कराना सुरक्षित नहीं है।
अब कब होगी नई तारीखों की घोषणा?
समिति के सचिव भुवन नौटियाल ने स्पष्ट किया कि 2026 की यात्रा के लिए अभी कोई आधिकारिक ‘दिनपट्टा’ (कार्यक्रम) जारी नहीं किया गया था। अब 23 जनवरी को वसंत पंचमी के दिन आयोजित होने वाले मनौती महोत्सव में राजकुंवरों द्वारा ज्योतिष गणना के आधार पर राजजात के अगले वर्ष की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। तब तक मनौती के अन्य धार्मिक कार्यक्रम पूर्ववत चलते रहेंगे।
समिति ने सरकार के सामने रखे कड़े प्रस्ताव
बैठक में केवल यात्रा स्थगित ही नहीं की गई, बल्कि भविष्य की यात्रा को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:
- राजजात प्राधिकरण का गठन: समिति ने मांग की है कि तहसील और जिला स्तर पर आधिकारिक समितियों का गठन हो।
- स्थायी बजट की मांग: जिला योजना और राज्य बजट में ‘श्रीनंदा देवी राजजात’ के लिए एक स्थायी मद (Head) बनाया जाए।
- पर्यटन मानचित्र: मां नंदा के सभी पड़ावों को आधिकारिक घोषित कर देवराडा और कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाए।
- डिजिटल मैप: पूरी यात्रा का एक संयुक्त मैप तैयार किया जाए और सहायक मार्गों पर ढांचागत विकास किया जाए।
आस्था और परंपरा का संगम है राजजात
श्रीनंदा देवी राजजात केवल एक यात्रा नहीं बल्कि हिमालयी संस्कृति की पहचान है। सातवीं-आठवीं सदी से चली आ रही इस पैदल यात्रा में चौसिंग्या मेंढा (चार सींगों वाला भेड़) पथ प्रदर्शक होता है। कुमाऊं और गढ़वाल के मेल वाली इस यात्रा में श्रद्धालु रिंगाल और भोजपत्र की छंतोलियां लेकर मीलों का पैदल सफर तय करते हैं।
इस बैठक में पंडित महानंद मैठाणी, सुशील रावत, जयविक्रम सिंह कुंवर, भुवन हटवाल सहित अन्य कई पदाधिकारी मौजूद रहे, जबकि कुछ सदस्य वर्चुअली भी शामिल हुए।
