
गौचर/चमोली:
उत्तराखंड के चमोली जिले के ऐतिहासिक गौचर मैदान में रविवार को आयोजित राज्य स्तरीय ‘किसान मेले’ में एक अलग ही नजारा देखने को मिला।केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न केवल 65 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी, बल्कि पहाड़ की पारंपरिक जीवनशैली में रमते हुए खुद धान कूटा और चक्की पीसकर किसानों का मान बढ़ाया।
सूट-बूट छोड़ ठेठ पहाड़ी अंदाज में दिखे नेता
मेले में स्टॉल्स के निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सीएम धामी का ठेठ पहाड़ी अंदाज चर्चा का विषय बन गया। दोनों दिग्गजों ने ‘ओखली’ (पारंपरिक कुटाने का यंत्र) में मूसल से धान की कुटाई की। इसके बाद उन्होंने ‘जांदरा’ (हाथ से चलाने वाली पत्थर की चक्की) पर गेहूं पीसा और पारंपरिक तरीके से मथनी चलाकर दही भी मथा।
इस दृश्य को देख वहां मौजूद महिलाएं और किसान गदगद हो गए। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ये यंत्र सिर्फ मशीनें नहीं, हमारी संस्कृति और पहाड़ के स्वाभिमान के प्रतीक हैं। आज खुद यह काम करके मुझे सुकून मिला है।”
किसानों के खाते में सीधे ₹65 करोड़ ट्रांसफर
मंच से केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने एक क्लिक के माध्यम से प्रदेश के हजारों किसानों के खातों में कुल 65 करोड़ रुपये की फसल बीमा राशि और अन्य सहायता सीधे हस्तांतरित की। इसके अलावा, क्षेत्र में कृषि और औद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया।
मालटा और चौलाई बनेगी पहचान
शिवराज सिंह चौहान ने चमोली के प्रसिद्ध ‘मालटा’ (माल्टा फल) और ‘चौलाई’ की जमकर तारीफ की। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार उत्तराखंड के माल्टा और मोटे अनाज (श्री अन्न) को अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए ‘ब्रांडिंग’ और ‘पैकेजिंग’ पर विशेष काम करेगी। उन्होंने कहा, “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी अब यहीं काम आएगी।”
मुख्यमंत्री बोले- किसानों का सम्मान हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गौचर मेला हमारी समृद्ध कृषि परंपरा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में ‘प्राकृतिक खेती’ को बढ़ावा देकर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है।
मेले में हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने दोनों नेताओं का पारंपरिक वाद्य यंत्रों और फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया।
