
गोपेश्वर: विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। इसी क्रम में रविवार को ‘पंच पूजा’ के तीसरे दिन एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया गया। विधि-विधान के साथ धाम में ‘खड्ग पुस्तक’ को बंद कर दिया गया है। इस रस्म के पूरा होते ही अब भगवान बदरीविशाल के मंदिर में शीतकाल तक वेद-ऋचाओं का वाचन और गूंज सुनाई नहीं देगी।
पंच पूजा का तीसरा दिन और खड्ग पुस्तक का महत्व
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अनुसार, कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत शुक्रवार (21 नवंबर) से पंच पूजाएं शुरू हुई थीं। रविवार को तीसरे दिन मुख्य रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल और वेदपाठियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खड्ग पुस्तक का पूजन किया। इसके बाद अपराह्न में औपचारिक रूप से पुस्तक को बंद कर दिया गया। मान्यता है कि इसके बाद भगवान की स्तुति में वेदों का पाठ बंद हो जाता है और मंदिर शीतकालीन मौन की ओर अग्रसर होता है।
आज से फूलों से सजेगा धाम
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कपाट बंदी की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। सोमवार से बदरीनाथ मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाने का कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कपाट बंद होने के अवसर पर कई विशिष्ट अतिथियों के धाम पहुंचने की संभावना है।
माँ लक्ष्मी को मिलेगा गर्भगृह में आने का न्यौता
बदरीनाथ धाम की परंपराएं अत्यंत भावुक और विशिष्ट हैं। कपाट बंद होने के मुहूर्त से ठीक एक दिन पहले, माँ लक्ष्मी को भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का औपचारिक न्यौता दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि यात्रा काल (ग्रीष्मकाल) के दौरान माँ लक्ष्मी मंदिर प्रांगण में स्थित लक्ष्मी मंदिर में निवास करती हैं। कपाट बंद होने के समय उन्हें पुनः नारायण के सानिध्य (गर्भगृह) में लाया जाता है। भक्तों और पुजारियों के लिए यह ईश्वर के मिलन का एक अत्यंत भावुक क्षण होता है।
ये रहे उपस्थित
खड्ग पुस्तक बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, अमित बंदोलिया, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, नगर पंचायत ईओ सुनील पुरोहित और थाना प्रभारी नवनीत भंडारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
