मथुरा: उत्तर प्रदेश के बरसाना और नंदगांव, दो पवित्र नगर जो अपनी अद्भुत परंपराओं के लिए जाने जाते हैं, एक ऐसी अनोखी परंपरा का निर्वाह करते हैं जो न केवल उनके बीच के संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि राधाकृष्ण के दिव्य प्रेम को भी दर्शाती है। यहाँ की परंपरा में, बिना विवाह के ही ससुराल के रिश्ते को स्वीकार किया जाता है, जो कि राधा और कृष्ण के प्रेम की अनुपम छवि को प्रतिबिंबित करता है।
इस अद्वितीय परंपरा का आधार है राधाकृष्ण की कथाएँ, जिनमें उनके बीच के प्रेम को बिना किसी बंधन के माना जाता है। बरसाना की गलियों में गूंजते भजन और नंदगांव के मंदिरों में बजते कीर्तन इस प्रेम की गाथा को जीवंत करते हैं। यहाँ के लोग इस परंपरा को बड़े ही आदर और श्रद्धा के साथ मनाते हैं, और यह उनके जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है।
इस परंपरा की खासियत यह है कि यह न केवल दो गांवों के बीच के संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे प्रेम कोई सीमा नहीं जानता। बरसाना और नंदगांव की यह परंपरा न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरे विश्व में राधाकृष्ण के प्रेम का प्रतीक बन चुकी है।
बरसाना और नंदगांव के बीच की अनोखी परंपरा, जहां हर नंदगांव का युवा बरसाना को अपनी ससुराल मानता है, विश्व प्रसिद्ध हो चुकी है। लठामार होली के दौरान, बरसाना की महिलाएं नंदगांव के युवाओं को अपने देवर के रूप में स्वीकार करती हैं और इस दौरान एक दूसरे पर प्रेम से भरी लाठियां बरसाती हैं। यह परंपरा न केवल दोनों गांवों के बीच के अटूट बंधन को दर्शाती है, बल्कि राधाकृष्ण के पावन प्रेम की भी याद दिलाती है।
इस उत्सव में, बरसाना की गलियों में गूंजते भजन और नंदगांव के मंदिरों में बजते कीर्तन इस प्रेम की गाथा को जीवंत करते हैं। लठामार होली की यह परंपरा न सिर्फ भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे प्रेम और उत्सव की भावना सीमाओं को पार कर विश्वभर में अपनी छाप छोड़ती है। बरसाना और नंदगांव की यह लठामार होली अपने अनूठे आयोजन और आध्यात्मिक महत्व के कारण दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
ऐसी मान्यता द्वापर युग
एक समय की बात है, द्वापर युग में, जब भगवान कृष्ण नंदगांव में अपने पिता नंद और माता यशोदा के साथ रहते थे। वहीं बरसाना में, राधा अपने परिवार के साथ अपना जीवन बिता रही थी। दोनों के बीच एक अद्वितीय प्रेम था, जिसे आज भी लोग अपने दिलों में बसाए हुए हैं।
इस अद्वितीय प्रेम के कारण, नंदगांव और बरसाना के निवासियों के बीच वैवाहिक संबंध नहीं किए जाते। यह एक ऐसी मान्यता है जिसे स्थानीय लोगों ने बनाया है, ताकि वे कृष्ण और राधा के बीच के अद्वितीय संबंध को याद रख सकें। उनका मानना है कि नए रिश्तों के चक्कर में कृष्णकालीन रिश्ता धुंधला न पड़ जाए।
इस प्रकार, यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कृष्ण और राधा के प्रेम को याद रखने के लिए, नंदगांव और बरसाना के लोगों ने अपनी जीवनशैली में एक अद्वितीय परंपरा को जीवंत रखा है।
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