चारधाम यात्रा 2026 से पहले BKTC का बड़ा फैसला: बद्रीनाथ-केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की ‘नो-एंट्री’; मंदिर परिसर और गर्भगृह में जाने पर रोक

- 19 अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा, 121.7 करोड़ का बजट पास।
- रोजगार पर असर नहीं: खच्चर-पालकी वाले मंदिर परिसर के बाहर तक जा सकेंगे।
- सिख, जैन और बौद्ध श्रद्धालुओं पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
- ओवैसी ने इसे छुआछूत बताया; जबकि चीफ इमाम ने किया फैसले का समर्थन।
देहरादून | उत्तराखंड में 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा से पहले बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम समेत BKTC के अधीन आने वाले 47 मंदिरों में अब गैर-हिंदुओं (गैर-सनातनियों) का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित होगा।
मंगलवार (10 मार्च 2026) को देहरादून में BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बजट बैठक में इस अहम प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 121.7 करोड़ रुपए का बजट भी पारित किया गया है।
मंदिर परिसर और गर्भगृह में लागू होगा नियम
BKTC ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल मंदिर परिसर और गर्भगृह पर लागू होगा। चूंकि उत्तराखंड में ज्यादातर मंदिर पहाड़ियों पर हैं और वहां तक पहुंचने के लिए डोली, कंडी और घोड़े-खच्चर का इस्तेमाल होता है, जिनका संचालन गैर-हिंदू भी करते हैं। ऐसे में उनके रोजगार पर असर नहीं पड़ेगा। वे मंदिर परिसर के बाहर तक यात्रियों को छोड़ सकेंगे।
सिख, जैन और बौद्ध आ सकेंगे
समिति ने ‘गैर-हिंदू’ को भी स्पष्ट किया है। जो सनातन धर्म को नहीं मानते, उन पर यह रोक है। हिंदू सनातन धर्म से निकले सिख, जैन और बौद्ध श्रद्धालुओं पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा, वे पहले की तरह दर्शन कर सकेंगे।
BKTC अध्यक्ष बोले- पवित्रता बनाए रखने के लिए यह जरूरी
BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड में अवैध मजारों का निर्माण हुआ है और धर्म विशेष के लोगों ने लैंड जिहाद कर माहौल खराब करने की कोशिश की है। धार्मिक स्थलों की पवित्रता और पौराणिकता को बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है, ताकि श्रद्धालु यहां सिर्फ तीर्थाटन के उद्देश्य से आएं। उन्होंने कहा कि संविधान भी हर धर्म को अपनी व्यवस्थाएं और परंपराएं चलाने का अधिकार देता है।
फैसले पर पक्ष-विपक्ष: ओवैसी बोले- यह छुआछूत, इमाम संगठन ने किया समर्थन
गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन करने की मांग सबसे पहले जनवरी में हरिद्वार की गंगा सभा ने उठाई थी। इस फैसले पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं:
- विरोध: AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान का मखौल और समानता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए ‘छुआछूत’ करार दिया। वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अरशद मदनी ने इसे समाज को बांटने वाला बताया।
- समर्थन: ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी ने फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मक्का-मदीना में भी गैर-मुस्लिमों को इजाजत नहीं है। हर जगह के अपने नियम होते हैं और मुस्लिमों को गंगोत्री जाने से बचना चाहिए।
- सरकार का रुख: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि धार्मिक स्थलों की व्यवस्था वहां के संचालनकर्ता, संत समाज और मंदिर समितियां ही तय करेंगी। सरकार उनकी राय के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।
चारधाम में इस बार मोबाइल भी बैन
चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ शुरू होगी। 6 मार्च से यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं। इस बार सरकार ने मंदिर परिसरों में रील बनाने वालों पर लगाम कसने के लिए मोबाइल फोन ले जाने पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध (Mobile Ban) लगा दिया है।
tv10india.नॉलेज: इन प्रमुख मंदिरों में लागू हुआ बैनबद्रीनाथ, केदारनाथ, त्रियुगीनारायण मंदिर, नरसिंह मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालीमठ, पंच केदार (मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर), पंच बद्री (योगध्यान बद्री, भविष्य बद्री, आदि बद्री, वृद्ध बद्री), गौरी कुंड मंदिर और कालिशिला समेत कुल 47 पौराणिक मंदिर
