देहरादून : साल 2025 के दूसरे और अंतिम चंद्र ग्रहण के कारण उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारों धामों, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट रविवार दोपहर को बंद कर दिए गए। ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:58 बजे से शुरू होते ही मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए। वहीं, धर्मनगरी हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध सांध्यकालीन गंगा आरती भी दोपहर में ही संपन्न हो गई।
भारतीय समयानुसार, यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही प्रारंभ हो जाता है, जिसे एक अशुद्ध काल माना जाता है। इसी सूतक काल के चलते दोपहर 12:58 बजे चारों धामों के कपाट बंद कर दिए गए। इस दौरान मंदिरों में किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना और आरती नहीं होगी।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि सूतक काल लगने के कारण बदरीनाथ और केदारनाथ के साथ-साथ अन्य संबंधित मंदिरों के कपाट भी ग्रहण काल तक बंद रखे जाएंगे। सोमवार को सुबह मंदिरों के गर्भगृह की साफ-सफाई और अन्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करने के बाद ही पूजा-अर्चना और दर्शन दोबारा शुरू किए जाएंगे।
उधर, हरिद्वार में भी चंद्र ग्रहण का असर धार्मिक गतिविधियों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। हरकी पैड़ी पर जो गंगा आरती सामान्यतः सूर्यास्त के समय होती है, वह रविवार को दोपहर 12:30 बजे ही कर दी गई। सूतक काल लगते ही हरकी पैड़ी समेत मनसा देवी, चंडी देवी और दक्ष मंदिर जैसे सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
यह चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे “ब्लड मून” भी कहा जा रहा है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 28 मिनट की होगी।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के द्वार बंद रहते हैं और भगवान के विग्रह का स्पर्श करना वर्जित होता है।
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