
देहरादून: उत्तराखंड में सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रतीक ‘चारधाम यात्रा’ इस महीने की 19 तारीख से शुरू होने जा रही है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और अब तक 8 लाख से अधिक लोग पंजीकरण करा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रा मार्ग पर बढ़ते ‘डेंजर जोन’ (संवेदनशील क्षेत्र) सरकार और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
19 अप्रैल को खुलेंगे कपाट: ये है शेड्यूल
प्रदेश में 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा का विधिवत आगाज हो जाएगा। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। परंपरा के अनुसार, यात्रा यमुनोत्री से शुरू होकर बदरीनाथ धाम के दर्शन के साथ संपन्न होती है।
श्रद्धालुओं का बढ़ता आंकड़ा
आंकड़े बताते हैं कि चारधाम यात्रा के प्रति लोगों का आकर्षण साल दर साल बढ़ रहा है:
- साल 2024: लगभग 46 लाख श्रद्धालु।
- साल 2025: करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
- इस साल: अब तक 8 लाख से ज्यादा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जिनमें केदारनाथ और बदरीनाथ के लिए सबसे ज्यादा होड़ है।
100 डेंजर जोन बने चुनौती, 700 करोड़ का बजट मंजूर
इस साल यात्रा मार्ग पर भूस्खलन (Landslide) की समस्या पहले से अधिक गंभीर नजर आ रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, पिछले साल जहां 53 बड़े लैंडस्लाइड जोन थे, वहीं इस साल इनकी संख्या बढ़कर 100 हो गई है।
- सरकार की तैयारी: भारत सरकार ने इन संवेदनशील क्षेत्रों के उपचार के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है।
- राहत कार्य: 100 में से लगभग 80 डेंजर जोन पर सुरक्षा कार्य शुरू कर दिया गया है।
- तैनाती: संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे भारी मशीनें और कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं ताकि मार्ग अवरुद्ध होने पर उसे तुरंत खोला जा सके।
सुरक्षा का ‘चक्रव्यूह’: 15 सुपर जोन और 137 सेक्टर
पुलिस विभाग ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:
- पूरी यात्रा को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टरों में विभाजित किया गया है।
- प्रत्येक सेक्टर लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में होगा।
- निगरानी के लिए दो सीओ (CO) स्तर के अधिकारियों की देखरेख में कंट्रोल रूम बनाया गया है।
- करीब 15 हजार सुरक्षाकर्मी (ITBP, NDRF, SDRF और उत्तराखंड पुलिस) तैनात रहेंगे।
इन क्षेत्रों में बरतनी होगी विशेष सावधानी
श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान कुछ खास संवेदनशील इलाकों में बेहद सावधान रहने की जरूरत है:
- केदारनाथ मार्ग: सोनप्रयाग और गौरीकुंड के पास भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है।
- बदरीनाथ मार्ग: तोता घाटी, लामबगड़, पागल नाला, सिरोह बगड़ और पीपलकोटी जैसे पुराने लैंडस्लाइड जोन अभी भी सक्रिय हैं।
- अन्य क्षेत्र: धरासू बैंड, महादेव चट्टी, नारकोटा, काकड़गढ़ और मुनकटिया जैसे इलाकों को भी संवेदनशील माना गया है।
20 से अधिक विभाग रहेंगे मुस्तैद
यात्रा को सुगम बनाने के लिए स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग (PWD), जल संस्थान, बिजली, पर्यटन और परिवहन विभाग सहित 20 से अधिक विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी जिला प्रशासनों को अलर्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
निष्कर्ष:
चारधाम यात्रा न केवल आस्था का संगम है, बल्कि यह उत्तराखंड की आर्थिकी और पहचान से भी जुड़ी है। प्रशासन का लक्ष्य तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए इस साल की यात्रा को अब तक की सबसे सुरक्षित और सुगम यात्रा बनाना है।
