
देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तराखंड परिवहन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। यात्रा सीजन के दौरान दूसरे राज्यों से वाहन लाकर उत्तराखंड में कमाई करने और फिर वापस चले जाने वाले ‘मौसमी’ वाहन स्वामियों पर लगाम कसने के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब देहरादून संभाग में वाहनों के पंजीकरण के लिए पुलिस सत्यापन (Police Verification) के साथ-साथ आय का ब्यौरा देना भी अनिवार्य होगा।
स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स के हितों की रक्षा
देहरादून आरटीओ (RTO) संदीप सैनी ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि चारधाम यात्रा शुरू होते ही बाहरी राज्यों के लोग एनओसी (NOC) लेकर अपनी बसें और टेंपो ट्रैवलर देहरादून आरटीओ में पंजीकृत करा लेते हैं। यात्रा सीजन खत्म होते ही ये लोग फिर से एनओसी लेकर अपने मूल राज्य लौट जाते हैं। इस प्रक्रिया से उत्तराखंड के उन ट्रैवल व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान होता है जो साल भर टैक्स भरते हैं और सरकारी कार्यों (जैसे चुनाव या अन्य ड्यूटी) में अपनी गाड़ियां उपलब्ध कराते हैं।
नए नियमों के घेरे में होंगे वाहन स्वामी
परिवहन विभाग ने बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को ‘फिल्टर’ करने के लिए निम्नलिखित सख्त नियम लागू किए हैं:
- पुलिस सत्यापन अनिवार्य: वाहन स्वामी के स्थायी पते या किराएनामे का स्थानीय पुलिस द्वारा भौतिक सत्यापन जरूरी होगा।
- दस्तावेजी प्रमाण: स्थायी भवन स्वामित्व प्रमाण पत्र या विधिवत पंजीकृत किरायानामा प्रस्तुत करना होगा।
- आर्थिक विवरण: वाहन स्वामी को पिछले 3 साल की इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) रिपोर्ट देनी होगी।
- फर्म के लिए नियम: यदि वाहन किसी कंपनी या फर्म के नाम पर है, तो जीएसटी (GST) प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
- तकनीकी जांच: आरटीओ निरीक्षक द्वारा वाहन का भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसमें वाहन के मूल रंग और वर्तमान रंग की भी जांच होगी।
- GPS और चालान रिपोर्ट: नए वाहनों के लिए अधिकृत जीपीएस (GPS) लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, पिछले 2 वर्षों में वाहन पर हुए चालानों की रिपोर्ट भी देखी जाएगी।
सेकंड हैंड गाड़ियों पर विशेष नजर
आरटीओ ने स्पष्ट किया कि सेकंड हैंड गाड़ियों के पंजीकरण के लिए नियम और भी सख्त रखे गए हैं ताकि प्रदेश में फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न रहे। विभाग का मानना है कि इन बदलावों से केवल वही गाड़ियां यात्रा मार्ग पर चलेंगी जो नियमों का पूरी तरह पालन करती हैं, जिससे प्रशासन के पास वाहनों का सटीक डेटा उपलब्ध रहेगा।
परिवहन विभाग का यह कदम न केवल चारधाम यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करेगा, बल्कि उत्तराखंड के स्थानीय वाहन स्वामियों और ट्रैवल एजेंटों के व्यवसाय को भी मजबूती प्रदान करेगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना पूरी प्रक्रिया और सत्यापन के किसी भी वाहन का ट्रांसफर या पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
