
टनकपुर/पिथौरागढ़: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सहकारिता मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और उनके विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि “सहकार से समृद्धि” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
पिथौरागढ़ में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री ने “अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025” के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारिता मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने 85.14 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ये योजनाएं क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होंगी।
सहकारिता आंदोलन को मजबूती
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सहकारिता की परंपरा भारत में प्राचीन काल से चली आ रही है, जो एक-दूसरे के सहयोग से स्वावलंबी बनने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के स्वप्न को साकार करने के लिए एक अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन के निर्णय की सराहना की।
उत्तराखंड में सहकारिता की प्रगति
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, और प्रदेश की सभी 671 सहकारी समितियां कंप्यूटरीकृत हो गई हैं। इसके अलावा, कई समितियां जन औषधि केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे ग्रामीण जनता को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां तथा अन्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत किसानों और स्वयं सहायता समूहों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, प्रदेश के सहकारी बैंकों में 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जमापूंजी है, जो इन संस्थाओं के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
