देहरादून/पौड़ी गढ़वाल।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड स्थित अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे। यहां उन्होंने श्री विष्णु पंचदेव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया। देवभूमि में लगातार बढ़ते पलायन और बंजर होते खेतों पर सीएम योगी ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोग सिर्फ गांव नहीं छोड़ रहे, बल्कि अपनी संस्कृति और पूर्वजों की विरासत से भी दूर हो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़ा एक ऐसा रोचक किस्सा भी सुनाया, जब एक देवस्थल पर सड़क बनाते समय बार-बार मशीनें खराब होने लगी थीं।
खबर की 3 अहम बातें:
पलायन पर चिंता: “गांव, जमीन और पहचान से दूर हो रहे लोग”
सीएम योगी ने कहा कि जो खेत कभी फसलों से लहलहाते थे, वे आज झाड़ियों से पटे पड़े हैं। कई गांवों में खेतों में एक दाना अन्न पैदा नहीं हो रहा है। पलायन केवल खेती को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत को धीरे-धीरे समाप्त कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी जड़ों और परंपराओं को बचाने का आह्वान किया।
खेती का नया विकल्प: “जंगली जानवर परेशान करें तो बागवानी अपनाएं”
मुख्यमंत्री ने खेती छोड़ने के लिए जंगली जानवरों को कारण बताने वालों को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जानवर पहले भी होते थे, लेकिन तब लोग जागरूक थे और खेतों से जुड़े रहते थे। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर जानवर गेहूं, धान या दाल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, तो किसानों को बागवानी की ओर बढ़ना चाहिए। योगी ने पंचूर के पास पोखरी गांव का उदाहरण दिया, जहां बाबा रामदेव द्वारा खुमानी, आड़ू और किन्नू का सफल उत्पादन किया जा रहा है। सरकार भी इसके लिए पूरी मदद करने को तैयार है।
रोचक किस्सा: “जहां बार-बार खराब हो रही थी JCB, वहीं निकला देवस्थल”
सीएम योगी ने श्री विष्णु पंचदेव मंदिर निर्माण का किस्सा सुनाते हुए बताया- “जिस जगह आज यह मंदिर है, वहां पहले गांवों को जोड़ने वाली सड़क बन रही थी। लेकिन काम के दौरान बार-बार JCB मशीन खराब हो रही थी। जब ग्रामीणों ने मुझे बताया, तो मैंने पुराने मानचित्र और इतिहास देखे। मुझे याद आया कि वहां पहले देवस्थल हुआ करता था।”
योगी ने बताया कि इसके बाद सड़क की दिशा बदली गई। जब ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वहां मंदिर भी बनाया जाएगा, तो बिना किसी मशीन के टूटे या मजदूर को नुकसान पहुंचे, सड़क का निर्माण सहजता से पूरा हो गया। यह हमारी आस्था और दैवीय शक्तियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
संस्कृति की कमी: “अब गांवों में ‘जागर’ नहीं होते”
सीएम योगी ने पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि बचपन में हर गांव-घर में साल में एक बार ‘जागर’ (देवताओं का आह्वान) जरूर होता था, लेकिन बीते कई सालों से उन्होंने गांवों में जागर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि गुरुवार रात 9:30 बजे जब जागर शुरू हुआ, तो लगा कि दैवीय शक्तियां जागृत हो गई हैं। उन्होंने पंचूर गांव में नवनिर्मित भगवान नृसिंह के प्राचीन मंदिर में नियमित पूजन की अपील की।
मंच से किसने क्या कहा?
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