
देहरादून: उत्तराखंड के जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट पर हवाई सेवाओं को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। एयरपोर्ट प्रशासन ने परिसर के भीतर एक नया एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर सह टेक्निकल ब्लॉक बनाने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना को अगले चार वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, नए एटीसी टावर के निर्माण के लिए एयरपोर्ट परिसर के भीतर उपयुक्त भूमि को चिह्नित किया जा रहा है। जैसे ही भूमि के चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, टावर और टेक्निकल ब्लॉक का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
पुराने टावर की चुनौतियों से मिलेगी मुक्ति
देहरादून एयरपोर्ट के इतिहास पर नजर डालें तो 2006-07 में जौलीग्रांट हवाई पट्टी का विस्तार कर इसे पूर्ण एयरपोर्ट का रूप दिया गया था। उससे पहले, हवाई पट्टी पर एक पुराने वाहन (वैन) के माध्यम से एटीसी टावर और मौसम विभाग का संचालन किया जाता था।
2006-07 के विस्तार के दौरान वर्तमान एटीसी टावर बनाया गया था। हालांकि, यह टावर टर्मिनल बिल्डिंग से काफी दूर, रनवे के लगभग मध्य किनारे पर स्थित है, जिससे तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं। नया टावर इन कमियों को दूर कर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बेहतर बनाएगा।
ऑटोमेशन और सर्विलांस से लैस होगा सिस्टम
नए टावर के निर्माण के साथ-साथ एयरपोर्ट की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है:
- नया ऑटोमेशन सिस्टम: वर्तमान एटीसी टावर में जल्द ही नया ऑटोमेशन सिस्टम लगाया जाएगा।
- सर्विलांस तकनीक: आधुनिक सर्विलांस उपकरणों की मदद से विमानों की निगरानी और नियंत्रण क्षमता में भारी वृद्धि होगी।
- स्वचालित संचालन: इन बदलावों के बाद एटीसी काफी हद तक स्वचालित (Automated) रूप से कार्य कर सकेगा, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना कम होगी और सुरक्षा बढ़ेगी।
हवाई यातायात बढ़ने से बढ़ी जरूरत
देहरादून एयरपोर्ट पर पिछले कुछ वर्षों में उड़ानों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। नए टर्मिनल के चालू होने के बाद यात्रियों और विमानों का दबाव बढ़ा है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नया एटीसी टावर और टेक्निकल ब्लॉक मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्य बिंदु:
- परियोजना: नया एटीसी टावर सह टेक्निकल ब्लॉक।
- समय सीमा: 4 साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य।
- तकनीक: नया ऑटोमेशन और सर्विलांस सिस्टम।
- उद्देश्य: सुरक्षित विमान संचालन और क्षमता विस्तार।
