देहरादून | अंतरराष्ट्रीय लेखक दिवस के मौके पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानो स्थित ‘लेखक गांव’ (Lekhak Gaon) में भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस महाकुंभ में भारत समेत दुनिया के 65 से ज्यादा देशों के साहित्यकार एक ही मंच पर जुटे। कार्यक्रम में 26 वरिष्ठ लेखकों को ‘लेखक सम्मान’ और 30 प्रतिभावान बाल रचनाकारों को ‘नवोदित लेखक सम्मान’ से नवाजा गया।
कार्यक्रम की 3 प्रमुख बातें:
लेखकों को सशक्त मंच देगा ‘लेखक गांव’: डॉ. निशंक
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि लेखक समाज का सजग द्रष्टा और संवेदना का सेतु होता है। उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि ‘लेखक गांव’ रचनाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। यहां न सिर्फ कार्यशालाएं और संवाद सत्र आयोजित होंगे, बल्कि लेखकों के साहित्य को ‘लेखक गांव प्रशासन’ के तहत प्रकाशित भी किया जाएगा।
वहीं, लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, “लेखक गांव केवल एक स्थान नहीं है, बल्कि यह एक सृजनात्मक चेतना का केंद्र है। यहां शब्दों के माध्यम से हमारी संस्कृति और संस्कारों को संवारा जाता है।”
10 किताबें लिखने वाले मनन और अन्य बाल लेखकों ने किया हैरान
समारोह का मुख्य आकर्षण वो नन्हें रचनाकार रहे, जिनकी उम्र भले ही कम हो लेकिन उनके विचारों ने किताबों का रूप ले लिया है। इनमें 10 किताबें लिख चुके मनन वर्मा और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित चैतन्य सिखोला (किताब- व्हाई वी आर ऑलवेज रनिंग) प्रमुख रहे।
इनके अलावा प्रणवी भारद्वाज (व्हिस्पर्स ऑफ़ हिल्स), लावण्या कुशवाहा, देवांश गुप्ता (द हॉरर्स ऑफ़ द हाउंटेड हाउस), श्रेया चुग, आदित्य सागर, वैष्णवी, याशिका शर्मा, अर्घ्य, आद्रिका सिंह, दीप कौर, भव्य भगत, साक्षी गुप्ता, वृतिका सिंह, कविशा वर्मा, वृंदा, निधि अरोड़ा, रेहांश चौधरी और समृद्धि गुप्ता को उनके शानदार लेखन के लिए सम्मानित किया गया।
सात समंदर पार से जुड़े साहित्यकार
समारोह के विभिन्न सत्रों में काव्य-पाठ और वैश्विक हिंदी पर चर्चा हुई। इसमें कुवैत से संगीता चौबे, अमेरिका से शुभ्रा ओझा, यूके से आशुतोष कुमार, कतर से शालिनी वर्मा, सिंगापुर से आराधना झा, लंदन से आशीष मिश्रा, स्पेन से पूजा अनिल, कनाडा से प्राची रंधावा, ऑस्ट्रेलिया से रीता कौशल और चीन से डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी सहित कई प्रवासी साहित्यकार ऑनलाइन जुड़े।
इन्होंने किया संचालन
कार्यक्रम का ऑनलाइन संचालन जर्मनी से अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी समन्वयक डॉ. शिप्रा शिल्पी ने किया, जबकि ऑफलाइन मंच डॉ. बेचैन कंडियाल और शिवम ढौंडियाल ने संभाला। कार्यक्रम में डॉ. सर्वेश उनियाल, डॉ. नीरजा शर्मा, सचिन राणा सहित अनेक साहित्यकार और शिक्षाविद् मौजूद रहे। अंत में संयोजक पूजा पोखरियाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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