
उत्तरकाशी: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का शंखनाद होने वाला है। विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। मंगलवार को यमुना जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खुशीमठ (खरसाली) में तीर्थ पुरोहितों और मंदिर समिति ने कपाट खुलने के शुभ मुहूर्त की आधिकारिक घोषणा की।
दोपहर 12:35 बजे खुलेगा मुख्य द्वार
यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि पंचांग गणना के अनुसार, 19 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कर्क लग्न, कृतिका नक्षत्र और आयुष्मान योग के विशेष संयोग में मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इस दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी और मां यमुना के दर्शनों के लिए देश-दुनिया के श्रद्धालुओं का इंतजार समाप्त होगा।
भाई शनिदेव की अगुवाई में मायके से विदा होंगी मां यमुना
कपाट खुलने की प्रक्रिया सुबह से ही शुरू हो जाएगी:
- सुबह 8:45 बजे: मां यमुना की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी।
- शनिदेव की विदाई: परंपरा के अनुसार, यमुना के भाई शनिदेव महाराज (सोमेश्वर महाराज) की डोली भी अपनी बहन को विदा करने यमुनोत्री धाम तक जाएगी। स्थानीय वाद्ययंत्रों और जयकारों के साथ यह भव्य यात्रा धाम पहुंचेगी।
यमुना जयंती पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
आज चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि को यमुना जयंती के रूप में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पद्मपुराण में मां यमुना को सूर्य पुत्री, यम की बहन और पापों का नाश करने वाली ‘कल्याणी’ कहा गया है। मान्यता है कि कालिंदी पर्वत (4421 मीटर की ऊंचाई) से निकलने वाली यमुना की धारा में स्नान करने मात्र से मनुष्य को जन्म-मरण के बंधनों और पापों से मुक्ति मिल जाती है।
‘बेटी’ की तरह होती है मां यमुना की विदाई
खरसाली गांव में मां यमुना को ‘बेटी’ का दर्जा दिया जाता है। छह महीने के शीतकालीन प्रवास के दौरान उन्हें मायके की तरह लाड-प्यार से रखा जाता है। मंदिर समिति के अनुसार, जिस तरह एक बेटी को ससुराल विदा किया जाता है, ठीक उसी भाव और परंपरा के साथ कपाट खुलने पर मां यमुना की विदाई की जाती है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था में लौटेगी रौनक
यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित होते ही उत्तरकाशी के पर्यटन व्यवसायियों में खुशी की लहर है।
- रोजगार: डामटा, बड़कोट, चरासू और जानकीचट्टी जैसे पड़ावों पर स्थित होटल, ढाबे और रेस्तरां अब फिर से गुलजार होंगे।
- आजीविका: पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी और पिट्ठू संचालकों की आजीविका भी इस यात्रा पर निर्भर करती है, जो अब छह महीने तक व्यस्त रहेंगे।
गंगोत्री के कपाट भी 19 को ही खुलेंगे
आपको बता दें कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन ही गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि भी घोषित कर दी गई थी। गंगोत्री और यमुनोत्री दोनों ही धामों के कपाट 19 अप्रैल को खुल रहे हैं। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे, जिसके साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह संचालित हो जाएगी।
- कपाट खुलने की तिथि: 19 अप्रैल (अक्षय तृतीया)
- समय: दोपहर 12:35 बजे
- डोली प्रस्थान: सुबह 08:45 बजे (खरसाली से)
- विशेष योग: कर्क लग्न, कृतिका नक्षत्र, आयुष्मान योग
- स्थान: यमुनोत्री धाम, उत्तरकाशी (उत्तराखंड)
