
देहरादून: शुक्रवार को उत्तराखंड की धरती पर राजनीतिक और आध्यात्मिक शक्तियों का अनूठा संगम देखने को मिला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड आगमन पर सूबे का सियासी और धार्मिक पारा चढ़ गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न केवल गर्मजोशी से अपने वरिष्ठ नेताओं की अगुवाई की, बल्कि हरिद्वार में आयोजित भव्य धार्मिक अनुष्ठान में उनके साथ मंच भी साझा किया।
1. जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत (Grand Welcome):
दिन की शुरुआत देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर एक आत्मीय स्वागत के साथ हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इस दौरान दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच की ‘केमिस्ट्री’ और आपसी समन्वय चर्चा का विषय बना रहा।
2. हरिद्वार में ‘संत सम्मेलन’ और प्राण-प्रतिष्ठा:
देहरादून से यह सभी दिग्गज नेता धर्मनगरी हरिद्वार पहुँचे। यहाँ सप्तऋषि आश्रम के पास स्थित भारत माता मंदिर मैदान में आयोजित ‘संत सम्मेलन’ और ‘गुरुदेव समाधि मंदिर’ में मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में उन्होंने शिरकत की।
- धार्मिक अनुष्ठान: नेताओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और देश की समृद्धि व सुरक्षा के लिए संतों का आशीर्वाद लिया।
- दिग्गजों की मौजूदगी: कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज समेत देश भर से आए साधु-संतों का जमावड़ा लगा रहा।
3. सीएम योगी का बड़ा बयान – “यूपी बदल चुका है”:
मंच से संबोधित करते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और विकास का जिक्र करते हुए कहा:
“एक समय था जब यूपी बीमारू राज्य माना जाता था, लेकिन आज यह भारत की अर्थव्यवस्था का ‘ब्रेकथ्रू’ बन रहा है। आज उत्तर प्रदेश में न कर्फ्यू है, न दंगा है, वहां आज सब ‘चंगा’ है।”
उन्होंने बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम को केवल आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रीय चेतना के केंद्र’ बताया।
4. सीएम धामी का संबोधन:
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संतों को ‘सनातन चेतना का जीवित प्रतीक’ बताया। उन्होंने कहा कि गंगा के तट पर संतों और राष्ट्रभक्त नेताओं का यह मिलन नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने यूपी और उत्तराखंड के बीच के अटूट रिश्ते पर भी जोर दिया।
हरिद्वार का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘सत्ता और संत’ के समन्वय का प्रतीक बन गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दोनों मुख्यमंत्रियों की एक मंच पर उपस्थिति ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सनातन संस्कृति की रक्षा के संकल्प को और मजबूत किया है।
