
चमोली। मां नंदा की बड़ी जात का आयोजन वर्ष 2026 में होगा या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अब 23 जनवरी को वसंत पंचमी के दिन होगा। दिनपट्टा (मुहूर्त) महोत्सव के अवसर पर मां नंदा को अवतारी पुरुष पर अवतरित किया जाएगा, जिसके बाद बड़ी जात के आयोजन को लेकर मां नंदा की इच्छा पूछी जाएगी। उसी के आधार पर आगे का कार्यक्रम तय किया जाएगा।
बुधवार को जिला प्रशासन ने बड़ी जात आयोजन समिति और राजजात समिति नौटी के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी। पूर्वाह्न 11 बजे बड़ी जात आयोजन समिति के पदाधिकारी और हक-हकूकधारी कलेक्ट्रेट सभागार पहुंचे, लेकिन राजजात समिति नौटी क्षेत्र के लोग बैठक में शामिल नहीं हुए। करीब ढाई घंटे बाद जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार बैठक में पहुंचे, लेकिन किसी ठोस निर्णय पर सहमति नहीं बन सकी।
बैठक के बाद कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने कहा कि अब बड़ी जात के आयोजन का फैसला मां नंदा स्वयं करेंगी। मां के आदेश के अनुसार ही आगे की सभी गतिविधियां तय होंगी।
बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत (सेनि) ने कहा कि वर्ष 750 ईस्वी में मां नंदा कुरुड़ में शिला रूप में प्रकट हुई थीं और तभी से यह सिद्धपीठ है। यह यात्रा मां के मायके कुरुड़ से ससुराल कैलाश तक की परंपरागत यात्रा है, जिसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने जात स्थगित करने के निर्णय को मां नंदा का अपमान बताया।
भगोती गांव के ग्रामीणों ने कहा कि अभी तक क्षेत्र में शौचालय, पेयजल और रेन शेल्टर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वर्ष 2014 में करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचे थे और इस बार संख्या और अधिक होने की संभावना है।
जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने कहा कि आपदा के चलते कई निर्जन पड़ावों पर व्यवस्थाएं नहीं हो पाई हैं। पहले जरूरी इंतजाम पूरे किए जाने चाहिए, उसके बाद ही जात का आयोजन संभव है।
मुख्यमंत्री के समन्वयक दलवीर दानू ने कहा कि मां नंदा जात की परंपरा बनाए रखने के लिए सभी पक्षों का एकमत होना जरूरी है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी की निगरानी में एक समिति बनाई जाएगी, जो यात्रा मार्ग और पड़ावों पर हुई और शेष तैयारियों की समीक्षा करेगी।
अब सभी की निगाहें 23 जनवरी को वसंत पंचमी के दिन होने वाले कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां मां नंदा के आदेश से बड़ी जात के भविष्य का निर्णय होगा।
