बिहार: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए बिहार में ‘मिशन-40’ के तहत एनडीए ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति को तेज कर दिया है। इस मिशन का उद्देश्य बिहार की सभी 40 लोकसभा सीटों पर विजय प्राप्त करना है। इसके लिए, एनडीए ने जातिगत समीकरणों को साधने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण हमेशा से एक महत्वपूर्ण कारक रहा है। इस बार एनडीए ने अपने उम्मीदवारों के चयन में विशेष रूप से सवर्ण, यादव, ओबीसी और ईबीसी मतदाताओं को ध्यान में रखा है। बीजेपी ने अपने परंपरागत सवर्ण वोट बैंक पर विशेष जोर दिया है, जबकि जनता दल यूनाइटेड ने अत्यंत पिछड़ी जाति और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं को साधने की कोशिश की है।
इसके अलावा, एनडीए ने दलित मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को अहम भूमिका में रखा है। इस रणनीति के तहत, बीजेपी ने अपने 17 में से 10 सवर्ण उम्मीदवारों को मौका दिया है, जबकि जदयू ने अपने 16 में से 11 उम्मीदवारों को इन्हीं दो वर्गों से चुना है।
इस चुनावी रणनीति के जरिए एनडीए ने विपक्षी गठबंधन की सोशल इंजीनियरिंग को चुनौती दी है और बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की स्थापना की है। इस रणनीति के परिणाम स्वरूप आने वाले चुनावों में एनडीए की सफलता का आकलन किया जा सकेगा।
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