विकासनगर (देहरादून): उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित कुल्हाल बॉर्डर पर गुरुवार (25 जून) को उस समय बेहद संवेदनशील स्थिति बन गई, जब पंजाब से आए बड़ी संख्या में निहंग सिखों ने उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने का प्रयास किया। हालांकि, पहले से ही मुस्तैद उत्तराखंड पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें हिमाचल सीमा पर ही रोक लिया। वर्तमान में सभी निहंग सिखों को पांवटा साहिब स्थित गुरुद्वारे में भेजा गया है, जहाँ उत्तराखंड पुलिस के अधिकारी उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
विकासनगर के पुलिस उपाधीक्षक (CO) विवेक सिंह कुटियाल ने बताया कि हिमाचल और उत्तराखंड के बॉर्डर पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की वार्ता चल रही है। निहंग सिखों द्वारा 25 जून को उत्तराखंड कूच के ऐलान के मद्देनजर उत्तराखंड पुलिस पहले से ही हाई अलर्ट पर थी।
सुरक्षा के लिहाज से 24 जून की शाम से ही कुल्हाल बॉर्डर पर भारी पुलिस बल के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों को तैनात कर दिया गया था। इस संवेदनशील मोड़ पर पूरे सीमा क्षेत्र को सुरक्षा बलों की मौजूदगी के चलते छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, करीब 300 से अधिक निहंग सिख उत्तराखंड कूच के लिए हिमाचल सीमा पर पहुंचे हैं, जिन्हें सीमा पर ही रोककर समझाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि शांति व्यवस्था प्रभावित न हो।
यह पूरा विवाद बीते 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक हिंसक झड़प से जुड़ा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग श्रद्धालुओं का कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों के साथ किसी बात पर विवाद हो गया था, जो बाद में मारपीट में बदल गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस संघर्ष के दौरान कुछ निहंगों ने तलवारों से हमला कर दिया, जिससे कई लोग घायल हो गए। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कर्णप्रयाग पुलिस ने चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से ही यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
कर्णप्रयाग में निहंग श्रद्धालुओं की गिरफ्तारी को गलत बताते हुए और उनकी रिहाई की मांग को लेकर निहंग सिखों ने 25 जून को कर्णप्रयाग तक विरोध मार्च (कूच) करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही उत्तराखंड पुलिस लगातार चौकस बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और बातचीत के माध्यम से निहंग सिखों को अपना कार्यक्रम स्थगित करने के लिए राजी करने की कोशिश की जा रही है।
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