
सरकार का दावा है कि यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि काम का ‘अपग्रेड’ है। यहाँ जानिए आम आदमी के लिए इसमें क्या “गुड न्यूज़” है:
- ज्यादा काम, ज्यादा दाम (100 से बढ़कर 125 दिन):
सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि अब ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। पुराने मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। यानी अब हर परिवार को करीब 1 महीना एक्स्ट्रा काम और एक्स्ट्रा पैसा मिलेगा। - गाँव का ‘स्मार्ट’ विकास:
यह कानून सिर्फ गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका फोकस “परिसंपत्ति निर्माण” (Asset Creation) पर है। इसका मतलब है कि अब जो काम होगा उससे गाँव में पक्के तालाब, नहरें, और सड़कें बनेंगी जो सालों तक चलेंगी और खेती-किसानी में मदद करेंगी। - हाई-टेक सिस्टम और पारदर्शिता:
भ्रष्टाचार रोकने के लिए इसमें नई तकनीक का इस्तेमाल होगा। बायोमेट्रिक अटेंडेंस और जियो-टैगिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पैसा सीधे असली मजदूर की जेब में जाए, बिचौलियों की नहीं। - ‘विकसित भारत’ का विजन:
इस बिल का पूरा नाम “Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)” है। इसका उद्देश्य 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए गाँवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। यह योजना PM गति शक्ति और अन्य राष्ट्रीय योजनाओं के साथ मिलकर काम करेगी।
