
देहरादून: उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ी और अनूठी पहल शुरू की है। देहरादून और हरिद्वार जैसे बड़े शहरों से सटे होने के कारण राजाजी टाइगर रिजर्व में कूड़ा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब इस समस्या से निपटने के लिए विभाग सरकारी तंत्र के साथ-साथ निजी संस्थाओं और आम नागरिकों को जोड़कर एक व्यापक सफाई अभियान चलाने जा रहा है।
क्या है वन विभाग की योजना?
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे ने बताया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ‘जन-आंदोलन’ होगा। इसके तहत:
- निजी संस्थाओं के साथ अनुबंध: रिजर्व प्रशासन निजी संस्थाओं के साथ एक साल का अनुबंध कर रहा है, जो नियमित रूप से सफाई सुनिश्चित करेंगे।
- जनभागीदारी: इस मुहिम में युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा।
- कूड़े का वर्गीकरण: सफाई के दौरान प्लास्टिक, सूखा कचरा और निर्माण मलबे को वर्गीकृत किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गंदगी का मुख्य स्रोत क्या है और भविष्य में उसे कैसे रोका जाए।
वन्यजीवों के लिए खतरा बना कूड़ा
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल के किनारों पर फेंका गया जैविक कचरा वन्यजीवों के लिए मुसीबत बन रहा है। कूड़े से आने वाली गंध हाथी, भालू और तेंदुए जैसे जानवरों को मानव बस्तियों की ओर आकर्षित करती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) का खतरा बढ़ जाता है। वन विभाग का मानना है कि यदि जंगल की सीमा पर कूड़ा फेंकना बंद हो जाए, तो इन संघर्षों की घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।
एक ‘मॉडल’ के रूप में होगा विकसित
राजाजी टाइगर रिजर्व की भौगोलिक स्थिति (देहरादून और हरिद्वार के बीच होना) इसे और अधिक संवेदनशील बनाती है। वन विभाग का लक्ष्य है कि इस सफाई अभियान को एक ‘मॉडल’ के रूप में तैयार किया जाए। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व सहित उत्तराखंड के अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
यह पहल न केवल जंगलों को स्वच्छ रखेगी, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने और स्थानीय लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
