
थराली: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आते ही नए जिलों के गठन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। हाल ही में उत्तरकाशी से अलग पुरोला को जिला बनाने की मांग के बाद अब चमोली जनपद से अलग थराली को जिला घोषित करने की मांग तेज हो गई है।
थराली विधानसभा क्षेत्र को जिला बनाने की मांग को लेकर थराली ब्लॉक सभागार में ‘विधानसभा थराली बौद्धिक जागरण विकास मंच’ के बैनर तले एक बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जुलूस की शक्ल में तहसील कार्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
मंच के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रमुख बख्ताबर सिंह नेगी ने कहा कि थराली क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित है। जिला मुख्यालय से अधिक दूरी होने के कारण आम जनता को प्रशासनिक कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से थराली को अलग जिला घोषित करने की मांग की।
मंच के उपाध्यक्ष डीडी उनियाल ने बताया कि वर्ष 1985 से क्षेत्रीय जनता लगातार थराली को जिला बनाने की मांग उठाती आ रही है, लेकिन आज तक इस पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
वहीं प्रधान प्रद्युम्न सिंह रावत ने कहा कि दूरस्थ गांवों के लोगों को स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य नंदन सिंह रावत ने भी कहा कि थराली भौगोलिक दृष्टि से विस्तृत और विषम क्षेत्र है, जिसकी समस्याएं अलग प्रकृति की हैं। ऐसे में इसे प्राथमिकता के आधार पर जिला बनाया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही छोटे प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण की मांग समय-समय पर उठती रही है। पहाड़ी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य में नए जिलों के गठन का मुद्दा अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनता रहा है।
