
श्रीनगर/पौड़ी: उत्तराखंड के श्रीनगर स्थित प्रसिद्ध धारी देवी मंदिर क्षेत्र में रविवार सुबह अलकनंदा नदी में दो बोटों की जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि एक बोट दूसरी के ऊपर चढ़ गई। हादसे में एक चालक संतुलन खोकर नदी में जा गिरा, जबकि दूसरी बोट कुछ देर तक अनियंत्रित अवस्था में नदी के बीच घूमती रही। घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह घटना 15 फरवरी की सुबह की है, जिसका वीडियो अब सामने आया है और तेजी से साझा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक बोट फरासू की ओर से मंदिर क्षेत्र की तरफ आ रही थी। मंदिर के पास पहुंचते ही दोनों बोटें एक-दूसरे के बेहद करीब आ गईं और आपस में टकरा गईं।
केवल चालक थे सवार, टला बड़ा हादसा
हादसे के वक्त दोनों बोटों में केवल चालक ही सवार थे। गनीमत रही कि कोई श्रद्धालु सवार नहीं था, अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक बोट का चालक उछलकर सीधे नदी में जा गिरा। चालक को पानी में गिरता देख मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थम सी गईं।
हालांकि चालक ने सूझबूझ और हिम्मत का परिचय देते हुए तैरकर खुद को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पास में संचालित एक अन्य बोट के चालक और कर्मचारियों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और अनियंत्रित बोट को संभालने में मदद की।
कुछ देर तक नदी में घूमती रही बोट
टक्कर के बाद एक बोट कुछ समय तक नियंत्रण से बाहर होकर नदी के बीच गोल-गोल घूमती रही। इससे किनारे पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। कई लोगों ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में बोट संचालन की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में बोट संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
धारी देवी मंदिर समिति के प्रबंधक लक्ष्मी प्रसाद पांडे के अनुसार, बोट संचालन को लेकर शिकायत रजिस्टर में अब तक 200 से अधिक आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में उपजिलाधिकारी श्रीनगर को पत्र भेजकर बोट संचालन को मंदिर परिसर से कम से कम 500 मीटर दूर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि बोट संचालन से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है, जिसका विरोध नहीं है, लेकिन सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इसे मंदिर क्षेत्र से दूर गोवा बीच या श्रीनगर की ओर गुफा के पास संचालित किया जाना चाहिए।
फिलहाल स्थानीय लोगों की तत्परता और बोट चालकों की समझदारी से एक बड़ा हादसा टल गया है। प्रशासन से मामले की जांच कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की जा रही है।
