
देहरादून: उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी खबर है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में कोई भी बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया है। राज्य गठन के 26 वर्षों के इतिहास में यह केवल तीसरी बार है जब उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है।
ऐतिहासिक फैसला: 2006 और 2014 के बाद अब मिली राहत
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले वर्ष 2006-07 और 2014-15 में बिजली दरों में शून्य बढ़ोतरी (Zero Hike) की गई थी। अब 2026-27 के लिए भी टैरिफ को यथावत रखकर आयोग ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद पहला टैरिफ ऑर्डर 2003 में आया था, तब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई ‘फिक्स चार्ज’ नहीं था और दरें महज 1.80 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट थीं।
रिकॉर्ड: कब कितनी बढ़ी बिजली की दरें?
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 16 वर्षों में बिजली दरों में उतार-चढ़ाव बना रहा। सबसे अधिक 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी वर्ष 2009-10 में दर्ज की गई थी।
16 साल में कब कितनी बढ़ोतरी
| वर्ष | प्रतिशत | बढ़ोतरी |
| 2010 | 10 | 17 |
| 2012 | 11 | 10 |
| 2013 | 14- | 05 |
| 2014 | 15 | 00 |
| 2015 | 16 | 7.30 |
| 2016 | 17 | 5.10 |
| 2017 | 18 | 5.80 |
| 2018 | 19 | 2.60 |
| 2019 | 20 | 3.50 |
| 2020 | 21 | 4.50 |
| 2021 | 22 | 4.30 |
| 2022 | 23 | 2.68 |
| 2023 | 24 | 9.64 |
| 2024 | 25 | 6.92 |
| 2025 | 26 | 5.62 |
| 2026 | 27 | 00 |
2003 बनाम अब: अंधेरे से उजाले तक का सफर
आयोग ने राज्य की प्रगति का ब्यौरा देते हुए बताया कि 2003 में जब पहला टैरिफ ऑर्डर जारी हुआ था, तब प्रदेश की स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी:
- गांवों की स्थिति: तब राज्य के 2801 गांवों में बिजली नहीं थी।
- कनेक्शन: केवल 30 प्रतिशत घरों में बिजली के कनेक्शन थे।
- उपभोक्ता संख्या: उस वक्त कुल उपभोक्ता लगभग 8.65 लाख थे, जिनमें से लगभग 1 लाख उपभोक्ताओं के पास मीटर भी नहीं थे।
- वर्तमान स्थिति: आज उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं का आंकड़ा 29 लाख को पार कर चुका है, जो राज्य के व्यापक विद्युतीकरण और विकास को दर्शाता है।
नियामक आयोग का यह फैसला न केवल आम उपभोक्ताओं बल्कि उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों के लिए भी बड़ी राहत माना जा रहा है, जिससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
