
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए रक्षा मंत्रालय के बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा की। वित्त वर्ष 2026–27 के लिए रक्षा बजट 7,84,678 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष के 6,81,210 करोड़ रुपये की तुलना में 15.3 प्रतिशत अधिक है।
बजट के अनुसार, कुल पूंजीगत व्यय 2,19,306 करोड़ रुपये और राजस्व व्यय 5,53,668 करोड़ रुपये रखा गया है। राजस्व व्यय में पेंशन के लिए 1,71,338 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पूंजीगत व्यय के तहत विमान और एयरो इंजन के लिए 63,733 करोड़ रुपये तथा नौसेना बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए 25,023 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष 2025–26 में रक्षा के लिए 6,81,210 करोड़ रुपये का बजट रखा था, जिसमें पूंजीगत व्यय संशोधित अनुमान के तहत 1,86,454 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने असैन्य, प्रशिक्षण और अन्य विमानों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घटकों और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने की घोषणा की। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान पुर्जों के निर्माण हेतु आयातित कच्चे माल पर भी सीमा शुल्क माफ किया गया है। इन कदमों से रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
बजट 2026 ऐसे समय में पेश किया गया है जब भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। वित्तीय वर्ष 2024–25 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि स्वदेशी उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो 2014–15 के मुकाबले 174 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी 23,622 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब कम से कम 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित किए जा रहे हैं। हालांकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अभी भी कुल उत्पादन का 77 प्रतिशत हिस्सा संभाल रही हैं, लेकिन निजी क्षेत्र की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित दो रक्षा औद्योगिक गलियारों ने अब तक 9,145 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। इस इकोसिस्टम के तहत 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिन्हें उदार एफडीआई नियमों, पीएलआई योजना और डिजिटल निर्यात मंजूरी जैसी नीतियों का समर्थन मिल रहा है।
