
देहरादून: उत्तराखंड सचिवालय में सचिवालय सेवा के अधिकारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने (सरेंडर करने) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वित्त सेवा के तीन अधिकारियों के बाद स्वास्थ्य विभाग के एक और कर्मचारी को सरेंडर किए जाने के बाद सचिवालय संघ ने कड़ा रुख अपना लिया है। संघ ने इन कार्रवाइयों को एकतरफा और अनुचित बताते हुए आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी है।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब वित्त विभाग के अनुभाग चार और 10 की जिम्मेदारी देख रहे अनुसचिव सत्येंद्र बर्मन, अनुभाग अधिकारी अरविंद सिंह और कमल कुमार को उनके पदों से हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद, स्वास्थ्य विभाग में तैनात समीक्षा अधिकारी शुभम को भी काम में लापरवाही और देरी से आने का हवाला देते हुए हटा दिया गया। इन लगातार हो रही कार्रवाइयों से सचिवालय के कर्मचारियों में भारी रोष है।
सचिवालय संघ के अनुसार, पिछले कुछ समय से सचिवालय सेवा के अधिकारियों को बिना किसी ठोस कारण के उनके अनुभागों से हटाने और सरेंडर करने की घटनाएं बढ़ी हैं। संघ का आरोप है कि इन निर्णयों के पीछे कोई स्पष्ट और न्यायोचित कारण नहीं बताया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इस मुद्दे को लेकर सचिवालय सेवा संघ और सचिवालय में तैनात अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
इस मामले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए सचिवालय संघ ने मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा है और वित्त सचिव से मुलाकात कर हटाए गए तीन अधिकारियों के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
सचिवालय संघ के महासचिव राकेश जोशी ने कहा, “सचिवालय सेवा के अधिकारियों को बिना किसी स्पष्ट कारण के सरेंडर करना न तो न्यायोचित है और न ही प्रशासनिक दृष्टि से सही।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सचिव स्तर के अधिकारियों का यही रवैया जारी रहा तो संघ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को विवश होगा।
प्रशासनिक हलकों में यह चिंता जताई जा रही है कि यदि इस विवाद का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो इसका सचिवालय की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
