
देहरादून। उत्तराखंड के हर ब्लॉक में अब पांच गांवों को ‘आदर्श गांव’ (Model Village) के रूप में विकसित किया जाएगा। विधानसभा स्थित कक्ष में पंचायतीराज विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान पंचायतीराज मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाना है।
ड्रेनेज और कूड़ा निस्तारण पर रहेगा फोकस
मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि चयनित आदर्श गांवों में ड्रेनेज (निकासी) और कूड़ा निस्तारण प्रबंधन (Waste Management) को आधुनिक और बेहतर बनाया जाएगा। इन गांवों को विकास के एक मॉडल के रूप में पेश किया जाएगा, ताकि अन्य गांव भी इनसे प्रेरणा ले सकें।
पंचायत भवन के बजट को दोगुना करने की तैयारी
बैठक में पंचायत भवनों की कमी को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया। मंत्री ने कहा कि पंचायत भवनों के निर्माण के लिए दी जाने वाली वर्तमान राशि 10 लाख रुपये को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा।
2,000 पंचायतों के पास अपना भवन नहीं
प्रदेश की भौगोलिक स्थिति का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 7,817 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से लगभग दो हजार पंचायतों के पास अभी तक अपने भवन नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राथमिकता के आधार पर सभी पंचायतों में भवनों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि ग्राम पंचायत पंचायतीराज की सबसे छोटी और सबसे महत्वपूर्ण इकाई है।
आय के स्रोत बढ़ाने और पारदर्शिता पर जोर
पंचायतीराज मंत्री ने गांवों के निरीक्षण के दौरान प्राथमिकता वाले कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंचायतों को केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के स्रोत बढ़ाने की दिशा में भी काम करना होगा। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि सभी कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।
बैठक में विशेष सचिव पंचायतीराज पराग मधुकर धकाते, निदेशक निधि यादव, अपर सचिव श्याम सिंह सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
