देहरादून। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की। उन्होंने प्रदेश में आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
बैठक में मुख्य सचिव ने अस्पतालों को 3 महीने के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने, डायलिसिस को 24×7 संचालित करने और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल करने की प्रक्रिया को पूरी तरह सरल बनाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा को चौबीसों घंटे (24×7) संचालित किया जाए। इसके साथ ही प्रदेश में जल्द किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने को कहा गया। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञ तैयार हैं। इस पर मुख्य सचिव ने अगले तीन महीने के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की डेडलाइन तय की।
नागरिकों को राहत देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता को जन्म प्रमाण पत्र के लिए अस्पताल या नगर निगम के चक्कर न लगाने पड़ें। ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए जिससे प्रमाण पत्र अपने आप (स्वतः) जारी होकर अभिभावकों को मिल जाए। यही व्यवस्था मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी लागू करने को कहा गया ताकि परिजनों को परेशानी न हो। साथ ही अधिक से अधिक स्वास्थ्य सेवाओं को ‘सेवा का अधिकार अधिनियम’ (Right to Service Act) के दायरे में लाने के निर्देश दिए।
अस्पतालों में उपचार और सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी अस्पतालों का ‘नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स’ (NABH) से प्रत्यायन (Accreditation) कराया जाएगा। प्रथम चरण में 31 मार्च 2027 तक सभी जिला अस्पतालों और बड़े उप-जिला अस्पतालों का NABH प्रत्यायन पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।
चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जो डॉक्टर रिटायरमेंट के बाद भी सेवा देना चाहते हैं, उनकी कागजी प्रक्रिया (Paperwork) रिटायरमेंट से पहले ही पूरी कर ली जाए। इससे पद खाली होते ही उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में तैनाती मिल सकेगी। इसके अलावा निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को ‘विजिटिंग डॉक्टर’ के रूप में सरकारी अस्पतालों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने अस्पतालों को ई-हॉस्पिटल में तब्दील करने के लिए ‘एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली’ (Integrated Health Management System) को तत्काल लागू करने को कहा। इसके सुचारू संचालन के लिए स्टाफ को तकनीकी प्रशिक्षण और सिस्टम के वार्षिक रखरखाव अनुबंध (AMC) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
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